मध्य प्रदेश में समग्र आईडी की जांच के दौरान इंदौर नगर निगम ने शहर के 22 जोनों में करीब 7 लाख से ज्यादा समग्र आईडी डिलीट (डी-एक्टिवेट) कर दी हैं। इससे हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बिना सूचना के हुई कार्रवाई
लोगों का कहना है कि उन्हें केवाईसी या समग्र आईडी वेरिफिकेशन कराने की कोई सूचना नहीं दी गई। बिना जानकारी दिए उनकी आईडी को डुप्लीकेट मानकर हटा दिया गया। कई लोगों को तो इसकी जानकारी तब लगी, जब वे किसी सरकारी काम के लिए दफ्तर पहुंचे। अब आईडी दोबारा चालू कराने के लिए उन्हें बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सरकार के निर्देश पर चला अभियान
कुछ समय पहले फर्जी समग्र आईडी का मामला सामने आया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में केवाईसी के जरिए समग्र आईडी की जांच कराने के निर्देश दिए थे। फर्जी या डुप्लीकेट आईडी को पोर्टल से हटाने का आदेश दिया गया था।
इसी के तहत इंदौर नगर निगम ने भी अभियान चलाया। जोनवार अधिकारियों की नियुक्ति की गई। जिन 7 लाख 5 हजार 956 लोगों ने केवाईसी नहीं कराई, उनकी आईडी डुप्लीकेट मानकर डिलीट कर दी गई।
जोन बदलने से बढ़ी परेशानी
कई लोगों की हाल ही में जोन बदल गए थे। ऐसे में उन्हें अलग-अलग जोनों के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पहले आईडी रिकवर करानी होती है, फिर आधार कार्ड से दोबारा लिंक करने की प्रक्रिया करनी पड़ती है।
योजनाओं का लाभ भी बंद
समग्र आईडी डिलीट होने से कई लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया है। आईडी आधार से भी अपने आप अलग (ऑटो डी-लिंक) हो गई है। इससे कई विभागों के काम रुक गए हैं। जैसे-जैसे लोग सरकारी दफ्तर पहुंच रहे हैं, उन्हें इस समस्या का पता चल रहा है।
रिकवरी का विकल्प मौजूद
नगर निगम के अनुसार, अभी डिलीट हुई समग्र आईडी को रिकवर करने का विकल्प उपलब्ध है। जो लोग केवाईसी नहीं करा पाए थे, उन्हें डुप्लीकेट मानकर हटाया गया था। लेकिन अब वे अपने जोन कार्यालय में जाकर आईडी दोबारा चालू करवा सकते हैं।
नगर निगम के उपायुक्त केशव सगर ने बताया कि डुप्लीकेट आईडी की जांच अभियान के दौरान की गई थी और अब जोन स्तर पर रिकवरी की व्यवस्था की गई है।
समग्र आईडी डिलीट होने से बड़ी संख्या में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन से उम्मीद है कि रिकवरी प्रक्रिया को आसान बनाया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
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