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श्रीगंगानगर। मध्य-पूर्व में अमेरिका, ईरान और इजरायल के संघर्ष का असर अब आम आदमी की रसोई तक पहुँच गया है। खाद्य तेलों की कीमतों में अचानक उछाल ने घरों के बजट पर असर डाला है।
तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी
आयात घटने और बाजार में कमी के कारण सोयाबीन, पाम, सरसों और मूंगफली तेल के दाम तेजी से बढ़ गए हैं।
- सोयाबीन तेल (15 किलो टिन) – पहले 2100 रुपए, अब 2400 रुपए (लगभग 300 रुपए की बढ़ोतरी)
- सरसों तेल (15 किलो टिन) – पहले 2200 रुपए, अब 2500 रुपए (300 रुपए बढ़ा)
- मूंगफली तेल (15 किलो टिन) – पहले 2500 रुपए, अब 2800 रुपए से अधिक (लगभग 300-400 रुपए बढ़ा)
- पाम तेल (15 किलो टिन) – पहले 1700 रुपए, अब 2200 रुपए (लगभग 500 रुपए बढ़ा)
- सनफ्लावर तेल (15 किलो टिन) – पहले 2400 रुपए, अब 2600 रुपए (150-200 रुपए बढ़ा)
मंडी में भाव
- सरसों – पहले 6000 रुपए प्रति क्विंटल, अब 6700 रुपए
- मूंगफली – 300-400 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ी
- तेल व्यापारी बताते हैं कि सोयाबीन और पाम तेल का अधिक हिस्सा विदेश से आयात होता है। आयात कम होने से बाजार में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी हुई।
उपभोक्ताओं पर असर
- शहर में मूंगफली और सरसों तेल की खपत सबसे अधिक है।
- घरेलू रसोई में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है, क्योंकि तेल महंगा होने से रोजमर्रा के खर्च बढ़ गए हैं।
कारण
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति में कमी
- विदेश से आयात घटने से घरेलू बाजार में तेल की कमी
- सोयाबीन और पाम तेल की कीमत बढ़ने से अन्य तेलों पर भी दबाव
शहर के लोग अब सरसों, मूंगफली और पाम तेल के दाम बढ़ने से परेशान हैं और दैनिक जरूरतों के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
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