क्या तमिलनाडु में सिर्फ एक सीट जीतने वाली BJP बन गई है किंगमेकर?
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में BJP को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या राज्य में सिर्फ एक सीट जीतने के बावजूद पार्टी चुनावी समीकरणों में किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन अब राष्ट्रीय दलों की सक्रियता भी धीरे-धीरे बढ़ती दिख रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीटों की संख्या भले कम हो, लेकिन BJP का वोट शेयर, संगठन विस्तार और गठबंधन की भूमिका उसे चुनावी बातचीत के केंद्र में ला सकती है। तमिलनाडु में सत्ता की लड़ाई मुख्य रूप से बड़े क्षेत्रीय दलों के बीच रहती है, लेकिन कई सीटों पर छोटे अंतर से हार-जीत होने के कारण छोटी राजनीतिक ताकतें भी बड़ा असर डाल सकती हैं।
BJP के लिए तमिलनाडु अभी भी चुनौतीपूर्ण राज्य माना जाता है। भाषा, क्षेत्रीय पहचान और द्रविड़ राजनीति यहां के चुनावी मुद्दों को काफी प्रभावित करती है। इसके बावजूद पार्टी लगातार संगठन मजबूत करने, बूथ स्तर पर पकड़ बनाने और युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।
विपक्षी दलों का कहना है कि BJP का प्रभाव राज्य में सीमित है और उसे किंगमेकर कहना जल्दबाजी होगी। वहीं BJP समर्थकों का तर्क है कि पार्टी भले सीटों में पीछे हो, लेकिन उसका बढ़ता वोट शेयर भविष्य के गठबंधन समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तमिलनाडु में BJP की असली ताकत इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अकेले चुनाव लड़ती है या किसी बड़े क्षेत्रीय दल के साथ गठबंधन करती है। यदि चुनाव में किसी पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो ऐसी स्थिति में छोटी सीटें और सीमित वोट बैंक भी सत्ता गठन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल, तमिलनाडु की राजनीति में BJP को लेकर बहस जारी है। एक सीट वाली पार्टी को किंगमेकर कहना अभी राजनीतिक अनुमान हो सकता है, लेकिन इतना तय है कि BJP राज्य में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने की रणनीति पर लगातार काम कर रही है।
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