क्या लापता हो गया मानसून? 70-80% भारत के ऊपर नहीं दिख रहे बारिश वाले बादल, बढ़ी चिंता
channel_009 | Weather News
देश के बड़े हिस्से में मानसून की रफ्तार अचानक कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। मौसम से जुड़ी रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस समय भारत के करीब 70 से 80 प्रतिशत भूभाग के ऊपर बारिश कराने वाले घने बादल नजर नहीं आ रहे। इससे किसानों और गर्मी-उमस से परेशान लोगों की चिंता बढ़ गई है।
मानसून के सक्रिय रहने पर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आने वाले बादल देश के बड़े हिस्से को ढकते हैं। लेकिन फिलहाल कई राज्यों में बादलों की कमी और बारिश के लंबे अंतराल की स्थिति दिखाई दे रही है। मौसम विज्ञान में ऐसी अवस्था को मानसून का कमजोर चरण या ब्रेक मानसून कहा जाता है।
इस दौरान मैदानी इलाकों में बारिश कम हो सकती है, जबकि हिमालय की तलहटी और पूर्वोत्तर के कुछ क्षेत्रों में ज्यादा वर्षा दर्ज हो सकती है। उत्तर और मध्य भारत में धूप तथा उमस बढ़ने से तापमान भी ऊपर जा सकता है।
सबसे अधिक चिंता खेती को लेकर है। धान, सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी खरीफ फसलों को नियमित बारिश की जरूरत होती है। लंबे समय तक बरसात न होने पर मिट्टी की नमी कम हो सकती है और किसानों को सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।
हालांकि, मानसून का कमजोर होना यह नहीं दर्शाता कि बरसात का मौसम समाप्त हो गया है। बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव क्षेत्र या अनुकूल मौसमी सिस्टम बनने पर बारिश दोबारा तेजी पकड़ सकती है। लोगों और किसानों को आधिकारिक मौसम चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।
channel_009 निष्कर्ष:
देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश वाले बादलों का न दिखना चिंता जरूर बढ़ाता है, लेकिन मानसून अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले मौसमी सिस्टम ही तय करेंगे कि बारिश कब और कितनी मजबूती से वापस लौटेगी।
क्या बारिश में यह लंबा ब्रेक किसानों की फसलों पर बड़ा असर डाल सकता है? कमेंट में अपनी राय बताइए।
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