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AI मौलाना और मौलवियों की एंट्री से मलेशिया में मचा घमासान, उठे कई मजहबी सवाल

कुआलालंपुर: मलेशिया में अब धार्मिक उपदेश देने के लिए इंसान नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बने मौलाना और मौलवियां लोगों को इस्लामी ज्ञान देने लगे हैं। सोशल मीडिया पर “AI डॉ. मुनीर” और “AI डॉ. मुनीरा” नाम के ये डिजिटल इस्लामी स्कॉलर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन इनके साथ कई विवाद भी जन्म ले चुके हैं।


तकनीक से तालीम या मजहब के साथ खिलवाड़?

AI के जरिए तैयार किए गए ये उपदेशक ना तो किसी मदरसे में पढ़े हैं, ना ही उन्होंने पारंपरिक इस्लामी शिक्षा प्राप्त की है। इसके बावजूद ये कुरान और हदीस से जुड़े सवालों के जवाब देने का दावा करते हैं। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि क्या तकनीक मजहबी मूल्यों और शिक्षाओं को सही तरीके से समझा सकती है?


मलेशिया में धर्मिक उपदेश देना आसान नहीं

मलेशिया में इस्लाम को राज्य धर्म का दर्जा प्राप्त है और यहां धार्मिक उपदेश देने के लिए सरकारी स्वीकृति अनिवार्य है। ऐसे में AI से संचालित मौलाना और मौलवियों की मौजूदगी ने कानूनी और धार्मिक संस्थाओं को मुश्किल में डाल दिया है। विशेषज्ञों का सवाल है कि यदि कोई तकनीकी गलती हो जाए या गलत जानकारी प्रसारित हो, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?


AI अवतार इंसानों जैसे बोलते और समझाते हैं

इन वर्चुअल मौलानाओं को मलेशिया के पूर्व मुफ्ती और इस्लामी मंत्री ज़ुल्किफली मोहम्मद अल-बक्री की 9,000 से अधिक धार्मिक रचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। इन्हें GPT तकनीक से प्रशिक्षित किया गया है ताकि ये उनके उपदेशों को आम लोगों तक आसान भाषा और सोशल मीडिया फ्रेंडली अंदाज में पहुँचा सकें।


TikTok पर छा गईं AI मुनीरा, पर विरोध भी गहरा

AI डॉ. मुनीरा की लोकप्रियता TikTok और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर चरम पर है। एक वायरल वीडियो में उन्होंने बताया कि क्या पति को अपनी गर्भवती पत्नी की खास फरमाइशें पूरी करनी चाहिए या नहीं—और लोगों ने इसे बेहद सराहा। लेकिन इसके साथ-साथ मॉडर्न लुक, महिलाओं की भूमिका, और AI के धार्मिक इस्तेमाल को लेकर काफी विरोध भी सामने आया।


धार्मिक विद्वानों की चेतावनी – ये शिक्षण नहीं, ब्रांडिंग है

कई इस्लामी विद्वानों का कहना है कि इस्लामी शिक्षा की परंपरा हमेशा उस्ताद और शागिर्द के बीच प्रत्यक्ष संवाद पर आधारित रही है। उनका मानना है कि मशीनें इस रिश्ते की गहराई को ना समझ सकती हैं और ना निभा सकती हैं। एक चिंतित यूजर ने लिखा, “अब कोई भी AI की मदद से स्कॉलर बनकर धार्मिक बातें करेगा और लोग उसे सच मान लेंगे।”


तकनीक और मजहब की टकराहट

AI मौलाना की एंट्री ने मलेशिया में धर्म और तकनीक की सीमाओं को लेकर बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां समर्थक इसे तकनीक के ज़रिए ज्ञान के प्रसार का साधन मान रहे हैं, वहीं आलोचक इसे मजहब की आत्मा से खिलवाड़ करार दे रहे हैं।

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