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Axiom-4: भारत का अंतरिक्ष में नया कदम, ISRO करेगा 7 अनोखे प्रयोग

नई दिल्ली:
भारत एक ऐतिहासिक मिशन की ओर अग्रसर है, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) पहली बार अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर जैविक और तकनीकी अनुसंधानों का नेतृत्व करेगा। Axiom Space द्वारा संचालित प्राइवेट मिशन Axiom-4 में भारत की हिस्सेदारी लगभग 60-70 मिलियन डॉलर है। इस मिशन का एक अहम हिस्सा हैं भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, जो पहली बार ISS की यात्रा पर जाएंगे।

ISS पर होंगे सात प्रमुख वैज्ञानिक परीक्षण

इस मिशन के तहत ISRO, NASA, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर 7 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग करेगा, जिनका मकसद अंतरिक्ष में जीवन, भोजन, और स्वास्थ्य से जुड़ी प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से समझना है।


1. माइक्रोग्रैविटी में स्क्रीन इंटरैक्शन का अध्ययन

एक्सपेरिमेंट में देखा जाएगा कि कैसे अंतरिक्ष यात्री शून्य गुरुत्वाकर्षण में डिजिटल डिस्प्ले के साथ संवाद करते हैं। इससे भविष्य के स्पेस क्राफ्ट के यूजर इंटरफेस को बेहतर बनाने की दिशा में जानकारी मिलेगी।


2. माइक्रोएल्गे और सायनोबैक्टीरिया की ग्रोथ

ISRO और NASA के वैज्ञानिक खाए जाने योग्य सूक्ष्म शैवाल (Microalgae) की वृद्धि और उनके जैविक गुणों का अध्ययन करेंगे। ESA के साथ मिलकर सायनोबैक्टीरिया की व्यवहारिक प्रतिक्रिया और फोटोसिंथेसिस को भी परखा जाएगा।


3. मांसपेशियों के पुनर्जनन पर अध्ययन

अंतरिक्ष में मांसपेशियों के कमजोर होने की प्रक्रिया को समझने और उसे रोकने के लिए मेटाबॉलिक सप्लिमेंट्स के असर का विश्लेषण किया जाएगा। इससे पृथ्वी पर भी मांसपेशी से जुड़ी बीमारियों के इलाज में मदद मिल सकती है।


4. अंतरिक्ष में फसलों की खेती

“स्प्राउटिंग सलाद सीड्स इन स्पेस” प्रोजेक्ट के तहत बीजों की अंकुरण प्रक्रिया को माइक्रोग्रैविटी में देखा जाएगा, जिससे भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए भोजन उगाने की राह तैयार की जा सके।


5. टार्डिग्रेड्स पर शोध

टार्डिग्रेड्स — सूक्ष्म लेकिन अत्यंत सहनशील जीव — की अंतरिक्ष में पुनर्जीवन क्षमता और उनके जीन व्यवहार का अध्ययन किया जाएगा। इससे चरम पर्यावरण में जीवों के अस्तित्व के नए पहलुओं पर रोशनी पड़ सकती है।


ISRO की अंतरिक्ष रणनीति का भविष्य

Axiom-4 भारत के लिए केवल एक प्रयोगात्मक मिशन नहीं है, बल्कि एक दृष्टिकोण है — जहां भारत अंतरिक्ष अन्वेषण की अगली पंक्ति में खड़ा होने की तैयारी कर रहा है। 2026-27 में भारतीय मानव मिशन, 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय की उपस्थिति का लक्ष्य इसी क्रम में है।

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