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ED के 20 साल पूरे, लेकिन ज्यादातर मामलों में अब तक नहीं आया अंतिम फैसला
सिर्फ 60 केस में सजा या निर्णय, 72% कुर्क संपत्ति वापस करनी पड़ी; 99% मामलों की जांच और सुनवाई अब भी लंबित
देश की सबसे चर्चित जांच एजेंसियों में शामिल प्रवर्तन निदेशालय यानी ED एक बार फिर आंकड़ों को लेकर चर्चा में है। एजेंसी के 20 साल पूरे होने के बीच सामने आए आंकड़ों ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दो दशकों में ED ने हजारों मामलों में जांच और कार्रवाई की, लेकिन इनमें से सिर्फ करीब 60 मामलों में ही अंतिम फैसला या सजा तक मामला पहुंच पाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि लगभग 99% मामलों में अब भी अंतिम निर्णय नहीं आया है।
आंकड़ों के अनुसार, एजेंसी द्वारा कुर्क की गई करीब 72% संपत्तियां बाद में वापस करनी पड़ीं। इससे जांच प्रक्रिया, सबूतों की मजबूती और कानूनी कार्रवाई की प्रभावशीलता को लेकर बहस तेज हो गई है।

ED मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग, आर्थिक अपराध और विदेशी मुद्रा कानून से जुड़े मामलों की जांच करती है। पिछले कुछ वर्षों में एजेंसी की कार्रवाई कई बड़े नेताओं, कारोबारियों और चर्चित हस्तियों तक पहुंची, जिसके कारण यह लगातार राजनीतिक और कानूनी विवादों के केंद्र में रही।
विपक्षी दल लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि ED का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जाता है। वहीं सरकार और एजेंसी का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून और सबूतों के आधार पर होती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में जांच और ट्रायल लंबा चलना आम बात है, क्योंकि इनमें बड़ी मात्रा में दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय लिंक शामिल होते हैं। हालांकि, इतने बड़े प्रतिशत में मामलों का लंबित रहना न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर भी सवाल खड़े करता है।
सोशल मीडिया पर भी यह रिपोर्ट तेजी से वायरल हो रही है। कुछ लोग ED की कार्रवाई को जरूरी बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स एजेंसी की कार्यप्रणाली और कम कन्विक्शन रेट को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जांच एजेंसियों की पारदर्शिता, जवाबदेही और तेज न्यायिक प्रक्रिया पर और ज्यादा बहस हो सकती है।
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