कनाडा के कनानास्किस शहर में आयोजित 2025 G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच पहली द्विपक्षीय बैठक हुई। इस मौके पर दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक मुद्दों पर साथ काम करने की प्रतिबद्धता जाहिर की।
🇮🇳🤝🇨🇦 भारत-कनाडा संबंध: ‘बेहद अहम साझेदारी’
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री कार्नी को उनके चुनाव में मिली सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा:
“भारत और कनाडा के बीच सहयोग अनेक क्षेत्रों में है – व्यापार, निवेश, ऊर्जा और शिक्षा में। हम लोकतंत्र, कानून के शासन और मानवाधिकारों जैसे साझा मूल्यों में विश्वास रखते हैं।”
पीएम मोदी ने इस बैठक को ‘उत्कृष्ट’ करार दिया और G7 सम्मेलन की सफल मेज़बानी के लिए कनाडा को बधाई भी दी।
🌍 वैश्विक चुनौतियों पर संयुक्त रुख
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने कई अहम वैश्विक विषयों पर साझा दृष्टिकोण रखा:
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ऊर्जा सुरक्षा और संक्रमण
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य
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आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय दमन के खिलाफ एकजुटता
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ग्लोबल साउथ की चिंताओं को वैश्विक मंच पर स्थान दिलाना
🗣️ प्रधानमंत्री कार्नी का बयान
मार्क कार्नी ने कहा:
“G7 में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति भारत की वैश्विक भूमिका और नेतृत्व की पुष्टि करती है। भारत के साथ मिलकर हम ऊर्जा, तकनीक और शांति के लिए काम करने को तैयार हैं।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत का G7 में आमंत्रण देना इस साझेदारी को एक नए मुकाम तक ले जाने की दिशा में पहला कदम है।
🕊️ तनावपूर्ण अतीत से आगे की ओर?
यह बैठक उस पृष्ठभूमि में हुई है जब भारत और कनाडा के रिश्तों में खालिस्तानी मुद्दे को लेकर गहरा तनाव रहा है। हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में भारी गिरावट आई थी।
इस बातचीत को संबंधों में पुनर्निर्माण की पहल के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकेत है कि कनाडा की नई सरकार भारत के साथ सामरिक साझेदारी को फिर से जीवंत करना चाहती है।
🔚 निष्कर्ष: रणनीतिक सहयोग की नई शुरुआत
G7 सम्मेलन के मंच पर पीएम मोदी और पीएम कार्नी की मुलाकात भारत-कनाडा संबंधों को एक नई दिशा में ले जाने की कोशिश है। साझा हितों और वैश्विक चुनौतियों के बीच, यह साझेदारी अब कूटनीतिक पुनर्निर्माण की ओर अग्रसर दिखती है।
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