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IMF की अहम बैठक से पहले पाकिस्तान की बढ़ी चिंता, भारत-पाक तनाव के बीच आर्थिक मोर्चे पर संकट

कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है। जहां पाकिस्तान को भारत की संभावित प्रतिक्रिया का डर सता रहा है, वहीं उसे एक और बड़ी चुनौती का सामना 9 मई को होने जा रहा है। इस तारीख को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की एक निर्णायक बैठक होने जा रही है, जिसमें पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का रिव्यू किया जाएगा।

7 अरब डॉलर की डील और पहली परीक्षा

पाकिस्तान ने जुलाई 2024 में IMF के साथ 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज पर सहमति जताई थी, जो 37 महीनों तक चलेगा और इसमें कुल छह मूल्यांकन (रिव्यू) शामिल होंगे। 9 मई को होने वाला यह पहला रिव्यू है। यदि यह सफल रहता है, तो पाकिस्तान को लगभग 1 अरब डॉलर की अगली किश्त प्राप्त हो सकती है।

इसके अलावा, पाकिस्तान ने IMF से 1.3 अरब डॉलर का अतिरिक्त लोन भी मांगा है, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रस्तावित Resilience and Sustainability Facility (RSF) के तहत आएगा। यह मीटिंग पाकिस्तान के लिए दोहरी कसौटी साबित होगी—पुरानी डील के तहत प्रदर्शन और नए फंड की मंजूरी।

क्यों घबराया हुआ है पाकिस्तान?

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस वक्त गहरे संकट में है। महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है, विदेशी मुद्रा भंडार सीमित हो चुका है और निवेशकों का भरोसा भी कमजोर पड़ा है। IMF का बेलआउट पैकेज पाकिस्तान के लिए एक आर्थिक जीवनरेखा बन गया है।

हालांकि मार्च 2025 में IMF की समीक्षा टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया था और कुछ सुधारों की सराहना भी की—जैसे ब्याज दरों को ऊंचा रखकर महंगाई को काबू में रखने की कोशिश और ऊर्जा क्षेत्र में किए गए कदम। इसके बावजूद IMF की सख्त शर्तों और पारदर्शिता की मांग के चलते अब भी संशय बना हुआ है।

फैसला 9 मई को

अगर IMF को लगा कि पाकिस्तान ने आवश्यक सुधारों को ठीक से लागू नहीं किया या पारदर्शिता में कोई कमी है, तो फंड की अगली किस्त रोकी जा सकती है। खासतौर पर जलवायु से जुड़े फंड के लिए तकनीकी स्तर पर अभी भी काम जारी है, जिससे असमंजस और गहराया है।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने हाल ही में उम्मीद जताई थी कि मई की शुरुआत में पाकिस्तान को हरी झंडी मिल सकती है, लेकिन तब तक IMF की स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक राहत की कोई उम्मीद नहीं है।

भारत-पाक के मौजूदा तनावपूर्ण हालातों के बीच यह आर्थिक मोर्चा पाकिस्तान के लिए एक और बड़ी परीक्षा बन गया है।

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