वॉशिंगटन/टोरंटो – भारत-कनाडा संबंधों पर टिप्पणी करते हुए सिख्स फॉर अमेरिका के फाउंडर जसदीप सिंह जेसी ने खालिस्तान आंदोलन और कनाडा की राजनीतिक स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को “सबसे कमजोर कनाडाई नेता” करार दिया और कहा कि ट्रूडो का कार्यकाल खालिस्तानी गतिविधियों के लिए एक “अनुकूल वातावरण” रहा।
“अब बदलाव का समय है”
जसदीप सिंह ने उम्मीद जताई कि नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में हालात में बदलाव आएगा और भारत-विरोधी तत्वों को अब खुला समर्थन नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा:
“खालिस्तानी तत्वों का प्रभाव अब खत्म होने वाला है। इनकी संख्या बेहद सीमित है, जबकि अधिकांश सिख भारत और पंजाब से प्यार करते हैं।”
खालिस्तानी विचारधारा पर कड़ा रुख
जेसी ने स्पष्ट किया कि खालिस्तान समर्थकों को सिख धर्म से जोड़ना गलत है, क्योंकि उनका व्यवहार सिख धर्म के सिद्धांतों से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि ये लोग सिख धर्म की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं और धार्मिक विश्वास की आड़ में राजनीतिक एजेंडा चला रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका और कनाडा में कुछ कट्टरपंथी नेता युवा प्रवासियों को झूठे राजनीतिक शरण के वादों से बहकाकर मानव तस्करी और अवैध गतिविधियों में धकेल रहे हैं।
पीएम मोदी की जी7 यात्रा: एक नई शुरुआत
जसदीप सिंह ने कनाडा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को G7 सम्मेलन के लिए आमंत्रित किए जाने को सकारात्मक कूटनीतिक पहल बताया। उन्होंने कहा:
“भारत को नजरअंदाज करना अब विकल्प नहीं है। यह कदम भारत-कनाडा संबंधों में एक नई शुरुआत साबित हो सकता है।”
अमेरिका और कनाडा में कट्टरपंथ पर रोक की उम्मीद
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में खालिस्तानी नेटवर्क धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और आने वाले समय में अमेरिका व कनाडा की सरकारें इस प्रकार की गतिविधियों पर सख्त रवैया अपनाएंगी। इससे न सिर्फ दो देशों के संबंध सुधरेंगे, बल्कि प्रवासन नीतियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
भारतीय प्रवासियों को एकता का संदेश
बातचीत के अंत में जसदीप सिंह ने विदेशों में बसे भारतीयों से आह्वान किया कि वे धर्म और जाति से ऊपर उठकर एकजुट रहें। उन्होंने कहा:
“हिंदू हमारे भाई हैं। सभी धर्मों का सम्मान करना हमारी संस्कृति है। हमें एक साथ खड़े रहना होगा ताकि कोई भी ताकत हमें बांट न सके।”
निष्कर्ष:
जसदीप सिंह का यह बयान भारत-कनाडा संबंधों में एक संवेदनशील मोड़ पर आया है, जब दोनों देश राजनयिक तनाव से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। नए नेतृत्व, बेहतर संवाद और सामुदायिक एकता की भावना से यह रिश्ता एक नई दिशा में बढ़ सकता है।
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