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ISRO और NASA का ‘NISAR मिशन’: धरती के बदलावों पर पैनी नज़र

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO और अमेरिका की NASA मिलकर एक ऐतिहासिक मिशन पर काम कर रहे हैं जिसका नाम है NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar)। यह मिशन पृथ्वी की सतह पर हो रहे परिवर्तनों की गहराई से निगरानी करने के लिए तैयार किया गया है और इसे दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में पहला बड़ा हार्डवेयर सहयोग माना जा रहा है।


क्या है ‘NISAR’ मिशन?

‘निसार’ एक पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) उपग्रह है जिसे लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में तैनात किया जाएगा। इसका उद्देश्य धरती की सतह पर हो रहे प्राकृतिक बदलावों जैसे —

  • हिमखंडों का पिघलना,

  • भू-गर्भीय गतिविधियाँ (जैसे भूकंप या ज्वालामुखी),

  • समुद्र जलस्तर में परिवर्तन,

  • कृषि भूमि में बदलाव,

  • और वन्य संसाधनों का आकलन —
    जैसे पहलुओं पर विस्तृत और उच्च-रिज़ोल्यूशन डाटा इकट्ठा करना है।

यह उपग्रह हर 12 दिन में दो बार पूरी पृथ्वी का स्कैन करेगा, जिससे बदलावों का लगातार मूल्यांकन किया जा सकेगा।


इस मिशन में कौन क्या कर रहा है?

इसरो और नासा ने इस परियोजना के लिए जिम्मेदारियाँ साझा की हैं:

🔹 NASA की भूमिका:

  • L-band Synthetic Aperture Radar (SAR) की आपूर्ति

  • GPS रिसीवर और वैज्ञानिक डेटा संचार प्रणाली

  • हाई-कैपेसिटी सॉलिड स्टेट रिकॉर्डर (डाटा स्टोरेज सिस्टम)

  • पेलोड डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम

  • 12-मीटर डाया रडार एंटीना का डिज़ाइन और टेस्टिंग

🔹 ISRO की भूमिका:

  • S-band SAR रडार प्रणाली का निर्माण

  • उपग्रह बस (satellite body) का निर्माण

  • प्रक्षेपण (launch) की ज़िम्मेदारी

  • उपग्रह को GSLV Mark-II रॉकेट से लॉन्च करना


मिशन में अब तक की प्रगति और चुनौतियाँ

हालांकि NISAR मिशन की लॉन्चिंग 2024 की शुरुआत में तय की गई थी, लेकिन तकनीकी जटिलताओं के कारण इसमें देरी हुई। दिसंबर 2024 में यह जानकारी सामने आई कि 12-मीटर रडार एंटीना के डिज़ाइन में कुछ संशोधन आवश्यक थे, जिसे सुधार के लिए अमेरिका भेजा गया।

अब परीक्षण के बाद यह तैयार है और जल्द ही इसे भारत में अंतिम रूप देकर लॉन्चिंग के लिए तैयार किया जाएगा।


NISAR क्यों है महत्वपूर्ण?

यह मिशन प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन के खिलाफ मानवता के लिए एक सतत निगरानी प्रणाली बन सकता है। इसका डाटा न केवल वैज्ञानिक शोध के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि:

  • आपदा प्रबंधन,

  • कृषि योजनाएं,

  • जलवायु नीति,

  • वन संरक्षण,

  • और भूजल प्रबंधन में भी मददगार साबित हो सकता है।


निष्कर्ष

‘NISAR’ केवल एक उपग्रह नहीं, बल्कि भारत और अमेरिका के वैज्ञानिक सहयोग का प्रतीक है, जो आने वाले वर्षों में धरती के भविष्य को बेहतर समझने और संभालने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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