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क्या आपने कभी सोचा है कि एक बच्चे में तीन लोगों का डीएनए (DNA) हो सकता है? यह अब कोई कहानी नहीं, बल्कि हकीकत बन चुकी है। हाल ही में ब्रिटेन में 8 ऐसे बच्चे जन्मे हैं, जिनमें उनके माता-पिता के अलावा एक तीसरे डोनर का डीएनए भी शामिल है।
🔬 क्या है ये नई तकनीक?
हमारे शरीर की जानकारी डीएनए (DNA) में होती है। ज्यादातर डीएनए हमें मां और पिता से मिलता है और ये कोशिका के केंद्रक (nucleus) में होता है। लेकिन हमारे शरीर में एक और खास डीएनए होता है जिसे माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (mitochondrial DNA) कहते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया हमारे शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा देने का काम करता है।
अगर माइटोकॉन्ड्रिया में कोई खराबी होती है तो बच्चा गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकता है, जैसे मांसपेशियों की कमजोरी, अंगों का ठीक से काम न करना, आदि।
🧪 पहले क्या होता था?
पहले IVF (In Vitro Fertilization) तकनीक का इस्तेमाल होता था। इसमें मां के अंडाणु (egg) और पिता के शुक्राणु (sperm) को लैब में मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता था और उसे मां के गर्भ में डाला जाता था। लेकिन कई बार बीमारी की पहचान करना मुश्किल हो जाता था।
💡 अब क्या नया है?
अब वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक अपनाई है:
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मां के अंडाणु या भ्रूण से स्वस्थ डीएनए लिया जाता है।
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उसे एक डोनर महिला के अंडे में डाला जाता है, जिसमें सिर्फ स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रिया होता है।
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डोनर का बाकी डीएनए हटा दिया जाता है।
इस तरह बच्चा माता-पिता का ही होता है, लेकिन उसमें डोनर के माइटोकॉन्ड्रिया का थोड़ा सा डीएनए (1% से भी कम) शामिल होता है। इससे बच्चे का रंग-रूप या व्यवहार पर कोई असर नहीं पड़ता।
इसे ऐसे समझिए जैसे ब्लड ट्रांसफ्यूजन – खून बदलता है, इंसान नहीं।
👶 कब और कितने बच्चे?
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2023 में पहली बार इस तकनीक से बच्चे का जन्म हुआ।
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अब तक ब्रिटेन में 8 स्वस्थ बच्चे इस तरीके से जन्म ले चुके हैं।
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यह उन परिवारों के लिए वरदान है जो माइटोकॉन्ड्रिया से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं।
⚠️ क्या कोई चिंता भी है?
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कुछ लोग इस तकनीक को लेकर चिंता जता रहे हैं क्योंकि इसके लंबे समय के प्रभाव अभी पूरी तरह से साफ नहीं हैं।
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अमेरिका जैसे कुछ देशों में यह तकनीक अब भी कानूनी तौर पर मंजूर नहीं है।
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लेकिन ब्रिटेन और कुछ अन्य देशों में यह तकनीक कई परिवारों की जिंदगी बदल रही है।
✅ निष्कर्ष:
यह तकनीक विज्ञान की बड़ी सफलता है, जो वंशानुगत बीमारियों से जूझ रहे परिवारों को नई उम्मीद दे रही है। आने वाले समय में यह और भी ज्यादा लोगों की ज़िंदगी में बदलाव ला सकती है।
तीन डीएनए से बना जीवन – विज्ञान का असली चमत्कार!
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