JF-17 Thunder, जिसे चीन और पाकिस्तान मिलकर विकसित करने का दावा करते हैं, एक मध्यम श्रेणी का लड़ाकू विमान है। पाकिस्तान इसे अपनी वायुसेना की रीढ़ मानता है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस विमान की असल क्षमता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद JF-17 चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में छिपे आतंकी ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की। इस हमले में 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया। ऐसे समय में पाकिस्तान की वायुसेना के JF-17 फाइटर जेट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि पाकिस्तान की ओर से भेजे गए इस फाइटर जेट को भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई में निष्क्रिय कर दिया, हालांकि भारतीय सेना की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
JF-17 की असलियत क्या है?
JF-17 थंडर को लेकर पाकिस्तान और चीन दोनों ही इसे “कम लागत में बेहतरीन प्रदर्शन” वाला विमान बताते हैं। इसका उत्पादन आंशिक रूप से पाकिस्तान में होता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसके अधिकांश स्पेयर पार्ट्स और तकनीक के लिए पाकिस्तान पूरी तरह चीन पर निर्भर है।
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अधिकतम रफ्तार: मैक 1.6
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ऑपरेशनल रेंज: लगभग 1200 किमी
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हथियार क्षमता: 3600 किलोग्राम तक
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हार्डप्वाइंट्स: 7
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अधिकतम टेकऑफ वेट: 12,700 किलोग्राम
पाकिस्तान की ताकत या भ्रम?
पाकिस्तान के पास लगभग 86 JF-17 फाइटर जेट्स सेवा में हैं, जिनमें ब्लॉक 1 और ब्लॉक 2 वेरिएंट शामिल हैं। पाकिस्तान की वायुसेना इन्हें आधुनिक मिसाइलों और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरणों से लैस बताती है। लेकिन वास्तविक युद्ध स्थितियों में इनकी उपयोगिता और विश्वसनीयता पर संदेह जताया जा रहा है, खासकर जब ये भारतीय मिसाइलों के सामने टिक नहीं पाए।
क्या चीनी हथियारों पर उठने लगे हैं सवाल?
चीन द्वारा विकसित किए गए कई हथियार प्रणाली — चाहे फाइटर जेट हों या रडार — पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सिस्टम वास्तविक लड़ाई के समय में प्रचार से कमज़ोर और प्रदर्शन में अधूरे साबित हो रहे हैं। JF-17 की हालिया पराजय ने इन संदेहों को और गहरा कर दिया है।
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