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रूस का ‘सुपर फाइटर’ ऑफर भारत ने क्यों ठुकराया?
सैटेलाइट गिराने में सक्षम MiG-31 को लेकर फिर चर्चा तेज
रूस के बेहद ताकतवर लड़ाकू विमान MiG-31 को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने भारत को इस हाई-स्पीड इंटरसेप्टर विमान का ऑफर दिया था, लेकिन भारत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
MiG-31 को दुनिया के सबसे खतरनाक इंटरसेप्टर विमानों में गिना जाता है। यह विमान दुश्मन के लड़ाकू विमानों के साथ-साथ मिसाइलों और सैटेलाइट्स को निशाना बनाने की क्षमता रखता है। इसकी तेज रफ्तार और लंबी दूरी तक हमला करने की ताकत के कारण इसे ‘दैत्य’ फाइटर जेट भी कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत ने इस विमान को कई रणनीतिक और तकनीकी कारणों से नहीं खरीदा। माना जाता है कि MiG-31 का रखरखाव बेहद महंगा है और भारतीय वायुसेना अपनी जरूरतों के हिसाब से अधिक आधुनिक और बहुउद्देश्यीय विमानों पर फोकस कर रही थी।
इसके अलावा भारत पहले से ही राफेल, सुखोई-30MKI और स्वदेशी तेजस जैसे प्लेटफॉर्म पर निवेश बढ़ा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने भविष्य की जरूरतों और तकनीकी संतुलन को देखते हुए यह फैसला लिया।
हालांकि, MiG-31 की क्षमताओं को लेकर आज भी दुनिया भर में चर्चा होती है और इसे रूस की सबसे ताकतवर हवाई ताकतों में शामिल माना जाता है।
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