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मध्यप्रदेश कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह को कांग्रेस पार्टी ने 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई पार्टी विरोधी बयानों और अनुशासनहीनता को लेकर की गई है।
क्यों की गई निष्कासन की कार्रवाई?
कांग्रेस की अनुशासन समिति के अध्यक्ष तारिक अनवर ने लक्ष्मण सिंह के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश पार्टी आलाकमान को भेजी थी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया।
विवादित बयान बने कारण
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कश्मीर आतंकी हमले पर बयान:
लक्ष्मण सिंह ने उमर अब्दुल्ला पर आरोप लगाया कि वे आतंकवादियों से मिले हुए हैं और कांग्रेस को नेशनल कांफ्रेंस से समर्थन वापस ले लेना चाहिए। -
राहुल गांधी को दी नसीहत:
उन्होंने रॉबर्ट वाड्रा को लेकर विवादित बयान दिया और राहुल गांधी से कहा कि सोच-समझकर बयान दें, क्योंकि वे नेता प्रतिपक्ष हैं।
पहले भी कर चुके हैं विवादित टिप्पणियां
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पार्टी हार पर आलोचना:
2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तंज कसा और पूछा कि “अपने पैरों पर कब खड़े होंगे?” -
2022 की हार पर टिप्पणी:
उन्होंने कहा था कि कांग्रेस की हार का कारण नेताओं के निर्णय हैं, कार्यकर्ताओं की बात सुननी चाहिए। -
पेंशन को लेकर बयान:
लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट किया था कि अगर शिक्षक और सैनिक पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो विधायकों, सांसदों और अधिकारियों की पेंशन भी बंद होनी चाहिए।
भाई के घर के बाहर धरना
2019 में लक्ष्मण सिंह चांचौड़ा को जिला बनाने की मांग को लेकर अपने ही भाई दिग्विजय सिंह के बंगले के बाहर धरने पर बैठ गए थे।
निष्कासन का असर
लक्ष्मण सिंह के निष्कासन के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। कांग्रेस पार्टी के लिए यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
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