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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन की याचिका खारिज कर दी और साफ कहा कि हर टावर के लिए किसानों को 12 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
कलेक्टर ने दिए मुआवजा देने के निर्देश:
फैसले के बाद जनसुनवाई में पहुंचे किसानों को सुनकर कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने पावर ग्रिड के अधिकारियों को कोर्ट के आदेश का पालन करने और किसानों को मुआवजा देने को कहा।
2012-2015 में किसानों की जमीन पर टावर लगे:
पावर ग्रिड ने 2012 से 2015 के बीच सतना जिले की उचेहरा तहसील के कई गांवों में 765 केवी की विद्युत लाइन बिछाई, जिसमें किसानों की जमीनों पर टावर खड़े किए गए। कुछ किसानों को मुआवजा मिला, पर कई किसान इससे वंचित रह गए।
कलेक्टर कोर्ट का पुराना आदेश:
पूर्व कलेक्टर अजय कटेसरिया ने 2 नवंबर 2021 को फैसला सुनाते हुए आदेश दिया था कि टावर से प्रभावित किसानों को 12 लाख रुपये और लाइन से प्रभावित किसानों को 3 हजार रुपये प्रति मीटर दिया जाए। यह मुआवजा 137 किसानों को मिलना था। लेकिन पावर ग्रिड ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया।
अन्य जनसुनवाई की बातें:
मैहर जिले से आए 29 आवेदन:
सतना कलेक्टर रानी बाटड ने मंगलवार को जनसुनवाई में कुल 29 मामलों पर सुनवाई की और संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।
गलत भुगतान पर कार्रवाई:
नगर निगम क्षेत्र के एक मामले में शिकायत मिली कि गलत लोगों को अनुग्रह राशि दे दी गई, जबकि 8 योग्य लोगों को अभी तक कुछ नहीं मिला। इस पर कलेक्टर ने निगमायुक्त को तत्काल कार्यवाही के आदेश दिए।
शिक्षा में मदद की अपील:
पुष्पांजलि पांडेय नाम की महिला ने जनसुनवाई में बताया कि उनके पति की मृत्यु हो चुकी है और दो बेटियां स्कूल में पढ़ती हैं। आर्थिक स्थिति खराब होने पर उन्होंने फीस में छूट की मांग की।
कलेक्टर के निर्देश के बाद स्कूल ने अनन्या की ₹13,860 और आनंदिता की ₹15,400 की फीस माफ कर दी।
इस तरह हाईकोर्ट और जिला प्रशासन के फैसले से किसानों और जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
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