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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एमपॉक्स वायरस के एक नए रिकॉम्बिनेंट (मिले-जुले) स्ट्रेन के दो मामलों की पुष्टि की है। यह नया स्ट्रेन दो अलग-अलग एमपॉक्स वायरस के जीन मिलकर बनने से तैयार हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पर लगातार नजर रखना जरूरी है।
कहां मिले मामले?
पहला मामला यूनाइटेड किंगडम में मिला, जहां मरीज हाल ही में साउथ-ईस्ट एशिया की यात्रा से लौटा था।
दूसरा मामला भारत में सामने आया, जिसमें मरीज की यात्रा अरब क्षेत्र से जुड़ी थी।
दोनों मरीजों में सामान्य एमपॉक्स जैसे लक्षण पाए गए और किसी की हालत गंभीर नहीं हुई। राहत की बात यह है कि संपर्क में आए लोगों में कोई नया केस नहीं मिला।
एमपॉक्स क्या है?
एमपॉक्स एक वायरल बीमारी है, जिसे पहले मंकीपॉक्स कहा जाता था।
इसमें फ्लू जैसे लक्षण और शरीर पर दाने या फफोले निकलते हैं।
यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से फैलती है। संक्रमित व्यक्ति द्वारा छुई गई चीजों या सतहों से भी संक्रमण हो सकता है।
नया स्ट्रेन कैसे बना?
जब किसी व्यक्ति के शरीर में एक साथ दो अलग-अलग वायरस मौजूद होते हैं, तो वे आपस में जीन बदल सकते हैं। इसे रिकॉम्बिनेशन कहा जाता है।
इस प्रक्रिया से नया वायरस बन सकता है, जिसमें दोनों पुराने वायरस के गुण होते हैं।
फिलहाल ऐसे मामले बहुत कम हैं, इसलिए यह साफ नहीं है कि यह नया स्ट्रेन कितना तेजी से फैल सकता है या कितना खतरनाक है।
एमपॉक्स के प्रकार
एमपॉक्स के दो मुख्य प्रकार हैं:
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क्लेड I – ज्यादा गंभीर, मुख्य रूप से मध्य अफ्रीका में पाया जाता है
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क्लेड II – कम गंभीर, 2022 से दुनिया के कई देशों में फैला
सामान्य लक्षण
एमपॉक्स के लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:
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त्वचा पर दाने, फफोले या घाव
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बुखार
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लिम्फ नोड्स में सूजन
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ठंड लगना
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सिरदर्द
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मांसपेशियों में दर्द
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थकान
हर व्यक्ति में सभी लक्षण नहीं दिखते। कुछ लोगों में केवल दाने होते हैं, जबकि कुछ में पहले फ्लू जैसे लक्षण आते हैं और बाद में रैश निकलते हैं।
दुनिया में क्या स्थिति है?
WHO के अनुसार एमपॉक्स अभी भी कई देशों में फैल रहा है। दिसंबर 2025 में कई देशों में नए मामले सामने आए और कुछ मौतें भी दर्ज की गईं। ज्यादातर मामले अफ्रीकी देशों में पाए गए।
सबसे जरूरी बात
अभी आम लोगों के लिए खतरे का स्तर कम माना जा रहा है, लेकिन जोखिम वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
अगर शरीर पर दाने या फ्लू जैसे लक्षण दिखें, तो इसे साधारण समझने की गलती न करें। समय पर जांच कराना और सावधानी बरतना ही सबसे बड़ा बचाव है।
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