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जयपुर।
आपातकाल की बरसी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा देशभर में ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भाजपा पर लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए मौजूदा स्थिति को “अघोषित आपातकाल” बताया।
गहलोत का भाजपा पर सीधा हमला
अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“भाजपा द्वारा संविधान हत्या दिवस मनाना ऐसा है जैसे कोई बेईमान व्यक्ति ईमानदारी पर भाषण दे।”
उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश में लोकतंत्र सबसे ज्यादा कमजोर हुआ है।
क्या बोले गहलोत?
गहलोत ने कहा कि देश में आज कोई अधिकारिक रूप से आपातकाल नहीं है, लेकिन जनता की आवाज, अभिव्यक्ति की आजादी और विपक्ष की भूमिका दबाई जा रही है।
उन्होंने लिखा:
“पत्रकार सवाल पूछे तो देशद्रोही, छात्र विरोध करें तो आतंकी, विपक्ष सवाल उठाए तो ED का शिकार बनता है। क्या यही लोकतंत्र है?”
मीडिया पर भी बोले गहलोत
गहलोत ने मीडिया की आज़ादी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि:
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NDTV, BBC, न्यूजक्लिक, दैनिक भास्कर जैसे मीडिया संस्थानों पर छापे डाले गए क्योंकि उन्होंने सरकार की आलोचना की।
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पत्रकार सिद्धीक़ कप्पन को रिपोर्टिंग के लिए सालों जेल में डाल दिया गया।
1975 की इमरजेंसी से गंभीर बताया मौजूदा हालात
गहलोत ने कहा कि 1975 की इमरजेंसी में भी किसी मुख्यमंत्री को गिरफ्तार नहीं किया गया था, लेकिन आज:
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दिल्ली और झारखंड के मुख्यमंत्री जेल में हैं।
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राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई।
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200 से ज्यादा विपक्षी नेताओं पर ईडी की कार्रवाई हुई, लेकिन जैसे ही वे भाजपा में गए, कार्रवाई बंद हो गई।
सरकारें गिराने का आरोप
गहलोत ने कहा कि भाजपा ने विधायकों की खरीद-फरोख्त से मध्यप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा, मणिपुर, अरुणाचल जैसे राज्यों में सरकारें गिराईं।
उन्होंने यह भी कहा कि आज लोग अपने फोन कॉल्स पर भी बात करने से डरते हैं, उन्हें लगता है कि कोई सुन रहा है।
केंद्र सरकार पर राज्य अधिकारों में हस्तक्षेप का आरोप
गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार:
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राज्य के विषयों पर कानून बनाकर राज्यों पर थोप रही है।
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राज्यपालों के जरिए विपक्षी सरकारों के कामकाज में अड़ंगा डाल रही है।
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भाजपा शासित राज्यों में मुख्यमंत्री थोपे जा रहे हैं।
अंत में गहलोत का संदेश
गहलोत ने कहा:
“हम डरेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं। हम संविधान, लोकतंत्र और जनता की आवाज को बचाने के लिए लड़ते रहेंगे।”
यह बयान देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और लोकतंत्र को लेकर बढ़ती बहस का हिस्सा बन गया है।
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