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मध्य प्रदेश के सीधी जिले में शुद्ध पानी की कमी का फायदा उठाकर अवैध RO प्लांट चलाए जा रहे हैं। बिना जांच और मानकों के ये प्लांट पानी सप्लाई कर रहे हैं, जिससे लोगों की सेहत पर खतरा मंडरा रहा है।
कैसे हो रही है धोखाधड़ी?
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RO के नाम पर सिर्फ नल का पानी महंगे दामों में बेचा जा रहा है।
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पानी की गुणवत्ता की कोई जांच नहीं हो रही है।
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सरकारी दफ्तरों से लेकर आम लोगों तक अवैध RO पानी की सप्लाई हो रही है।
प्रशासन की अनदेखी
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खाद्य विभाग खाने-पीने की चीजों की जांच करता है, लेकिन पानी की जांच पर ध्यान नहीं दिया जाता।
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RO प्लांट का पंजीयन अनिवार्य है, लेकिन कितने प्लांट रजिस्टर्ड हैं, इसकी जानकारी खुद अधिकारियों को नहीं है।
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निजी प्रयोगशालाओं में पानी की जांच संभव है, लेकिन सरकारी स्तर पर कोई सुविधा नहीं दी गई।
RO पानी की मांग क्यों बढ़ रही है?
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गिरते जलस्तर के कारण नल के पानी में फ्लोराइड और खारापन बढ़ गया है।
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लोग सेहत के डर से मिनरल और RO पानी पर निर्भर हो रहे हैं।
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शहरों के साथ-साथ अब गांवों में भी मिनरल वाटर का उपयोग बढ़ रहा है।
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शादी-समारोहों से लेकर रोजमर्रा के कामों तक में पैक्ड पानी का इस्तेमाल आम हो गया है।
कैसे हो रही है पैक्ड पानी की गड़बड़ी?
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होम डिलीवरी वाले वाहन दिनभर पानी के कैन सप्लाई कर रहे हैं।
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बिना आईएसआई मार्का वाले पाउच और बोतलों में पानी बेचा जा रहा है।
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कई पैक्ड पानी की निर्माण तिथि भी स्पष्ट नहीं होती।
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प्रशासन इन गड़बड़ियों से अनजान बना हुआ है।
शुद्ध पानी की कमी से बढ़ रही बीमारियां
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पानी में सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स होने चाहिए।
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अशुद्ध पानी से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
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लंबे समय तक खराब पानी पीने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है।
क्या कह रहे हैं अधिकारी?
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खाद्य सुरक्षा अधिकारी दनेश लोधी ने बताया कि RO प्लांट का ऑनलाइन पंजीकरण किया जाता है।
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कैन वाले पानी की जांच पीएचई विभाग (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी) करता है।
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अगर कोई शिकायत मिलती है तो जांच की जाएगी।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस अवैध पानी कारोबार पर कोई सख्त कदम उठाता है या नहीं
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