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रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस (RSV) एक सांस से जुड़ा संक्रमण है, जो देखने में सामान्य सर्दी-जुकाम जैसा लगता है। लेकिन नवजात शिशुओं और बुजुर्गों के लिए यह बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। छोटे बच्चों में यह तेजी से गंभीर रूप ले लेता है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।
स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 1 लाख बच्चों की मौत RSV से जुड़ी जटिलताओं के कारण हो जाती है। खासकर समय से पहले जन्मे बच्चों, कमजोर इम्युनिटी वाले शिशुओं और पहले से सांस की समस्या से जूझ रहे बच्चों में इसका खतरा ज्यादा होता है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
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हर साल दुनियाभर में करीब 36 लाख शिशु RSV के कारण अस्पताल में भर्ती होते हैं।
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इनमें से लगभग 14 लाख बच्चे 6 महीने से कम उम्र के होते हैं।
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भारत में भी नवजात शिशुओं में सांस से जुड़ी बीमारियों के कई मामलों में RSV एक बड़ी वजह है।
RSV क्या है और कैसे फैलता है?
यह एक तेजी से फैलने वाला वायरस है, जो फेफड़ों और सांस की नली को संक्रमित करता है।
यह खांसी, छींक या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है।
बड़ों में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन छोटे बच्चों में यह ब्रोंकियोलाइटिस और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है।
इसके शुरुआती लक्षण
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बहती नाक
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हल्का बुखार
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खांसी
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दूध पीने में परेशानी
अगर बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो, सीने में घरघराहट हो या होंठ नीले पड़ने लगें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
वैक्सीन कब लगवानी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के 28वें हफ्ते के बाद RSV की वैक्सीन लगवाई जा सकती है।
इससे मां के शरीर में बनी एंटीबॉडी बच्चे तक पहुंचती हैं और जन्म के बाद शुरुआती महीनों में उसे संक्रमण से बचाती हैं।
रिसर्च से पता चलता है कि इससे जन्म के बाद पहले 3 महीनों में संक्रमण का खतरा काफी कम हो सकता है।
नवजात के लिए सुरक्षा विकल्प
नवजात शिशुओं को एक विशेष एंटीबॉडी इंजेक्शन दिया जा सकता है, जो उन्हें RSV से बचाने में मदद करता है।
यह इंजेक्शन जन्म के बाद या संक्रमण के मौसम से पहले दिया जाता है।
ध्यान रखें, RSV का कोई पक्का इलाज नहीं है। इलाज केवल लक्षणों को नियंत्रित करने पर आधारित होता है। गंभीर स्थिति में बच्चे को अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है।
माता-पिता क्या सावधानी रखें?
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गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर से वैक्सीन के बारे में सलाह लें
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नवजात के लिए सुरक्षा इंजेक्शन की जानकारी लें
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बच्चे को भीड़-भाड़ से दूर रखें
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बीमार लोगों को बच्चे से दूर रखें
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साफ-सफाई और हाथ धोने की आदत रखें
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सांस लेने में परेशानी या तेज बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि RSV से बचाव ही सबसे सुरक्षित और असरदार तरीका है।
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