बीजिंग/वाशिंगटन:
चीन ने सोमवार को सख्त रुख अपनाते हुए उन देशों को चेतावनी दी जो अमेरिका के साथ व्यापार समझौते कर रहे हैं। बीजिंग ने स्पष्ट कहा कि वह किसी भी ऐसे समझौते को बर्दाश्त नहीं करेगा जो उसके हितों को नुकसान पहुंचाए, और उसने जवाबी कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “तुष्टीकरण से स्थायी शांति नहीं आती, और स्वार्थी समझौते टिकाऊ नहीं होते।” उनका इशारा खास तौर पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के उन देशों की ओर था जो वर्तमान में अमेरिका से व्यापारिक रियायतें हासिल करने के लिए समझौते की दौड़ में लगे हैं।
बताया गया है कि अमेरिका ने चीन पर 145% तक के टैरिफ लगा दिए हैं, कुछ वस्तुओं पर यह दर 200% तक पहुंच चुकी है। जवाब में चीन ने भी कई अमेरिकी उत्पादों पर 125% तक शुल्क लागू किया है।
इसी बीच अमेरिका के बड़े व्यापारिक साझेदार, जैसे दक्षिण कोरिया और जापान, अमेरिका के साथ बातचीत कर टैरिफ में रियायतों की उम्मीद कर रहे हैं। जापानी प्रधानमंत्री ने इस वार्ता को “दुनिया के लिए एक मॉडल” बताया। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत के दौरे पर हैं, जहां भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर चर्चा हो रही है।
बीजिंग ने साफ किया कि वह “दूसरों के हितों की कीमत पर” किए गए किसी भी समझौते का विरोध करेगा। मंत्रालय ने कहा, “अगर कोई देश चीन के हितों के विपरीत समझौता करता है, तो चीन मूकदर्शक नहीं रहेगा और जवाबी कदम उठाएगा।”
यह बयान उस समय आया है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था टैरिफ युद्ध और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से जूझ रही है। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि कौन-से देश चीन की चेतावनी को गंभीरता से लेते हैं।
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