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राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ क्षेत्र में नकली और घटिया खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों पर सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। यहां 13 फर्मों और फैक्ट्रियों के लाइसेंस 14 दिन के लिए निलंबित कर दिए गए हैं। ये कार्रवाई खाद के नमूने जांच में फेल होने के बाद की गई है।
किन फैक्ट्रियों पर हुई कार्रवाई?
कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीना के निर्देश पर कृषि विभाग ने किशनगढ़ की जिन फैक्ट्रियों के लाइसेंस निलंबित किए हैं, उनमें शामिल हैं:
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श्री गोवर्धन एग्रो (उदयपुर कलां)
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भूमि एग्रो इंडस्ट्रीज
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राघव एग्रो इंडस्ट्रीज
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मंगलदीप बायो फर्टिलाइजर्स (टीकावड़ा)
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अतिशय बायोटेक (पाटन)
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ट्रॉपीकल एग्रो सिस्टम इंडिया प्रा. लि. (तिलोनिया)
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दिव्या एग्रोफर्ट (नलू)
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ग्रीन एग्रो इंडस्ट्रीज (बांदरसिंदरी)
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शम्भू बायो फर्टिलाइजर (चौसला)
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श्री एग्रो अल्मास (इंदोली)
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राधिका एग्रो इंडस्ट्रीज (डींडवाड़ा)
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एक्वा एग्री प्रोसेसिंग (पाटन)
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श्रीनाथ एग्रो इंडस्ट्रीज (टीकावड़ा)
जांच में देरी, अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है
खाद के सैंपल लेने के बाद रिपोर्ट तैयार करने में देरी सामने आई है। कुछ गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब विभाग उन पर भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इससे पहले 11 अधिकारियों को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है।
बिना लाइसेंस बना रहे थे खाद
जांच में सामने आया कि तीन फर्में बिना लाइसेंस के खाद बना रही थीं:
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सनसाइन एडिबल ऑयल (चौसला)
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सत्वम एग्रो प्रा. लि. (बांदरसिंदरी)
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कमला बायोटेक (पाटन) – इस फर्म ने पहले ही लाइसेंस सरेंडर कर दिया था, फिर भी खाद बनाना जारी रखा।
इन तीनों फर्मों के खिलाफ खाद निर्माण रोकते हुए सीज की कार्रवाई की गई है और पुलिस केस भी दर्ज किया गया है।
सरकार का संदेश साफ – खाद में मिलावट या घटिया निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों की सेहत और फसल से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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