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राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़ा है, लेकिन अब भी 39 ऐसे पुलिसकर्मी हैं जिनके खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत यानी अभियोजन स्वीकृति नहीं मिल पाई है। ACB ने इसके लिए कई बार संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को पत्र भेजे हैं, लेकिन मंजूरी नहीं मिली।
एक ही व्यक्ति अब दोनों विभागों के मुखिया
राजस्थान पुलिस के डीजी यू.आर. साहू के वीआरएस लेने के बाद अब एसीबी के डीजी डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा को ही पुलिस विभाग का भी कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया है। ऐसे में अब दोनों विभाग एक ही मुखिया के अधीन हैं। इस वजह से उम्मीद जताई जा रही है कि अब भ्रष्ट अफसरों पर तेजी से कार्रवाई हो सकेगी।
डीजीपी का बयान
डीजीपी रवि प्रकाश मेहरड़ा ने कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि लंबित अभियोजन स्वीकृति के मामलों का जल्दी निस्तारण करें ताकि कोर्ट में केस चल सके और दोषियों को सजा दिलाई जा सके।
भ्रष्टाचार के मामलों में देरी क्यों?
ACB को हर बार भ्रष्ट पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बार भ्रष्ट अफसरों को रंगे हाथों पकड़ा गया है, फिर भी उन्हें बचाने की कोशिश होती है। कुछ अफसर अभियोजन स्वीकृति देने से इनकार कर देते हैं, जिससे केस अदालत तक नहीं पहुंच पाता।
सरकार की मंजूरी, फिर भी कार्रवाई नहीं
राज्य सरकार ने अब तक 24 मामलों में अभियोजन की मंजूरी दे दी है, लेकिन बाकी मामलों में अभी तक कोई हलचल नहीं दिख रही। ACB ने पहले संबंधित पुलिस अफसर, फिर गृह विभाग, और यहां तक कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) तक को छह बार पत्र लिखे हैं, लेकिन फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ACB की उम्मीदें कार्यवाहक DGP से
अब जब एसीबी और पुलिस, दोनों विभागों के प्रमुख एक ही अधिकारी हैं, तो ACB को उम्मीद है कि भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के खिलाफ अभियोजन की इजाजत जल्दी मिलेगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश जाएगा।
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