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पटना हाई कोर्ट ने मेडिकल लापरवाही के एक मामले में प्राइवेट नर्सिंग होम की कड़ी आलोचना की है। कोर्ट ने कहा कि बिहार में प्राइवेट नर्सिंग होम में इलाज के दौरान मरीजों की मौत अब आम बात हो गई है, जबकि ये नर्सिंग होम मरीजों और उनके परिवारों से भारी फीस वसूलते हैं।
यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें एक महिला की बच्चे को जन्म देते समय मौत हो गई थी। यह घटना कैमूर जिले के मोहनिया में स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम में हुई, जो बिना रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से चल रहा था।
सपने दिखाकर पैसे वसूलते हैं
जस्टिस राजीव रॉय ने कहा कि जब कोई गर्भवती महिला प्राइवेट नर्सिंग होम जाती है, तो उसके और उसके परिवार के मन में खुशी और उम्मीद होती है। लेकिन कई नर्सिंग होम इस उम्मीद का फायदा उठाकर बड़ी रकम वसूलते हैं और इलाज के नाम पर बड़े-बड़े सपने दिखाते हैं।
बुनियादी सुविधाओं की कमी
कोर्ट ने कहा कि हकीकत यह है कि ऐसे कई नर्सिंग होम में न तो जरूरी मेडिकल उपकरण होते हैं और न ही विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद रहते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि डिलीवरी के बाद परिवार को बच्चे के साथ उस महिला की बेजान लाश स्ट्रेचर पर लेकर अस्पताल से बाहर जाना पड़ता है।
अग्रिम जमानत सशर्त मंजूर
इस मामले में नर्सिंग होम की संचालिका, जो पेशे से नर्स है, ने अग्रिम जमानत की मांग की थी। कोर्ट ने यह देखते हुए कि ऑपरेशन किसी और डॉक्टर ने किया था और नर्स का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उसे अग्रिम जमानत देने का फैसला किया।
हालांकि, कोर्ट ने शर्त रखी कि वह नवजात बच्चे के नाम पर 1 लाख रुपये की राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा करेगी। यह पैसा बच्चा 16 साल की उम्र पूरी होने के बाद अपनी पढ़ाई के लिए निकाल सकेगा।
अवैध नर्सिंग होम पर सवाल
कोर्ट ने बिहार के कई जिलों में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे नर्सिंग होम पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे नर्सिंग होम जिला स्तर के अधिकारियों की जानकारी या संरक्षण में चल रहे हैं और इनके कारण कितनी महिलाओं की जान गई, इसका कोई सही आंकड़ा तक नहीं है।
हाई कोर्ट की यह टिप्पणी राज्य में मेडिकल व्यवस्था और प्राइवेट नर्सिंग होम की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
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