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अमेरिका की 36 देशों को चेतावनी: पहचान व सुरक्षा में सहयोग नहीं तो लग सकता है ट्रैवल बैन

वाशिंगटन, जून 2025 — अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों को सख्त करते हुए 36 देशों को स्पष्ट चेतावनी दी है: यदि नागरिकों की पहचान और वापसी के मामलों में अमेरिका को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, तो इन देशों के नागरिकों पर अमेरिका यात्रा के लिए प्रतिबंध लगाया जा सकता है।


🔒 क्यों उठाया गया यह कदम?

यह कदम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दूसरे कार्यकाल की आव्रजन नीतियों का हिस्सा है, जिसमें कहा गया था कि वे देश जो अमेरिका की सुरक्षा प्रक्रियाओं से मेल नहीं खाते, उन्हें ट्रैवल बैन का सामना करना पड़ सकता है।

  • जिन देशों को नोटिस मिला है, वे 60 दिनों के अंदर आवश्यक सुधार करें अन्यथा पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध की सिफारिश लागू हो सकती है।


📌 चिंताएं क्या हैं?

इन देशों से संबंधित तीन प्रमुख चिंताएं हैं:

  1. अमेरिका आने वाले यात्रियों की पहचान और दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर संदेह

  2. निर्वासित नागरिकों को वापस न लेने की प्रवृत्ति।

  3. कुछ मामलों में आतंकवादी गतिविधियों से कथित जुड़ाव


🛂 विदेश विभाग का बयान

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा:

“हम चाहते हैं कि ये देश अपने पासपोर्ट सिस्टम को सुधारें, नागरिकों की सही पहचान सुनिश्चित करें और अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं का सम्मान करें। यदि हमें भरोसा नहीं होता, तो हमें अपनी यात्रा नीतियों को सख्त करना पड़ेगा।”


🌍 किन देशों को चेतावनी दी गई है?

निम्न 36 देशों को सूचीबद्ध किया गया है:

अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से:

  • अंगोला, बेनिन, बुर्किना फासो, कैमरून, इथियोपिया, गैबॉन, घाना, आइवरी कोस्ट, लाइबेरिया, मलावी, मॉरिटानिया, नाइजर, नाइजीरिया, सेनेगल, दक्षिण सूडान, तंजानिया, युगांडा, जाम्बिया, जिम्बाब्वे आदि।

एशिया व मध्य पूर्व से:

  • भूटान, कंबोडिया, किर्गिस्तान, सीरिया।

कैरेबियन व प्रशांत क्षेत्र से:

  • एंटीगुआ और बारबुडा, डोमिनिका, सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट लूसिया, टोंगा, तुवालु, वानुअतु।


आगे क्या होगा?

यदि 60 दिनों के भीतर ये देश अमेरिकी मानकों पर खरे नहीं उतरते, तो:

  • उनके नागरिकों पर वीजा प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

  • अमेरिका के साथ द्विपक्षीय वीजा समझौते सस्पेंड किए जा सकते हैं।


यह पहल न केवल ट्रंप प्रशासन की ‘America First’ नीति का विस्तार है, बल्कि वैश्विक यात्रा सुरक्षा मानकों में कठोरता की दिशा में एक बड़ा संकेत भी।

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