वॉशिंगटन डीसी — अमेरिकी रक्षा विभाग ने गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान पर हाल ही में हुए हवाई हमलों की रणनीति और निष्पादन की विस्तृत जानकारी दी। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन कैन ने कहा कि इन हमलों में गहराई में छिपे परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
जनरल कैन ने प्रेस को उन बंकर बस्टर बमों की टेस्ट फुटेज भी दिखाई, जिनका उपयोग इस ऑपरेशन में किया गया। एक अमेरिकी अधिकारी ने CNN को बताया कि ईरान पर हुए हमलों में ऐसे 12 बमों का इस्तेमाल किया गया। यह बम सतह के नीचे जाकर विस्फोट करते हैं, जिससे सतही नुकसान नजर नहीं आता, लेकिन अंदर बहुत बड़ी तबाही मचती है।
जनरल कैन ने बताया, “इस मिशन में प्रमुख प्रभाव विस्फोट (ब्लास्ट) और ओवरप्रेशर के जरिए डाला गया था।” उन्होंने यह भी बताया कि छह में से प्रत्येक बम निर्धारित लक्ष्य पर सटीकता से गिरा, खासतौर पर फोर्डो में स्थित वेंटिलेशन शाफ्ट्स पर, जिन्हें ईरान ने कंक्रीट से ढकने की कोशिश की थी। पहले बम ने शाफ्ट को खोला और बाकी बम तेज़ गति से अंदर घुसे।
हालांकि, डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी की एक गोपनीय रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरानी परमाणु कार्यक्रम को केवल कुछ महीनों के लिए ही पीछे धकेला जा सका है और सभी ठिकानों को पूरी तरह नष्ट नहीं किया गया। इसके जवाब में हेगसेथ ने उस रिपोर्ट को “लो कॉन्फिडेंस” बताया और कहा कि मीडिया इस मिशन की सफलता को नजरअंदाज कर रहा है।
उन्होंने कहा, “यह हमला निर्णायक था—चाहें आप इसे विनाशकारी कहें या पूरी तरह तबाह करने वाला।”
जहाँ फोर्डो को सबसे ज्यादा बमों से निशाना बनाया गया, वहीं नतांज़ में केवल दो पेनिट्रेटर बम इस्तेमाल किए गए और इस्फहान पर एकमात्र मिसाइल हमले की पुष्टि की गई। जब पत्रकारों ने इस्फहान की भूमिगत सुरंगों में छुपे 880 पाउंड यूरेनियम की स्थिति पर सवाल किया, तो हेगसेथ ने कहा, “हम सभी खुफिया पहलुओं का मूल्यांकन कर रहे हैं।”
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर दावा किया कि ईरानी साइट पर देखे गए वाहन केवल कंक्रीट श्रमिकों के थे, जो शाफ्ट्स को ढंकने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा, “ऐसी कोई सामग्री वहां से नहीं निकाली गई — वह बहुत भारी है, बहुत खतरनाक है और ले जाने में बहुत समय लगता।”
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