नई दिल्ली — भारत सरकार ने अमेरिका से आग्रह किया है कि भारतीय छात्रों के वीज़ा आवेदनों को केवल योग्यता के आधार पर आंका जाए, न कि उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने वीज़ा आवेदकों के लिए पिछले पाँच वर्षों के सोशल मीडिया हैंडल साझा करना अनिवार्य किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता श्री जयसवाल ने कहा, “वीज़ा और आव्रजन (इमिग्रेशन) मामलों पर निर्णय किसी भी देश का संप्रभु अधिकार है। लेकिन हमने अमेरिका द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को देखा है, जिनमें वीज़ा फॉर्म में सोशल मीडिया पहचानकर्ता (यूज़रनेम) दर्ज करने की बात कही गई है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारा मानना है कि भारतीय नागरिकों के सभी वीज़ा आवेदनों की जांच निष्पक्ष तरीके से और योग्यता के आधार पर की जानी चाहिए। हम अमेरिका के साथ वीज़ा और कांसुलर मामलों पर लगातार संपर्क में हैं ताकि भारतीय नागरिकों के वैध हित सुरक्षित रह सकें।”
इस सप्ताह अमेरिका ने फिर से छात्रों के वीज़ा आवेदनों की प्रक्रिया शुरू की है। इसी के साथ अमेरिकी दूतावास ने घोषणा की है कि अब F, M और J श्रेणी के वीज़ा के लिए आवेदन करने वाले सभी छात्रों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को सार्वजनिक (public) करना होगा, ताकि अमेरिकी कानून के तहत उनकी पहचान और प्रवेश-योग्यता की जांच की जा सके।
दूतावास ने प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया, “अब सभी वीज़ा आवेदकों को अपने DS-160 फॉर्म में पिछले पांच वर्षों में उपयोग किए गए सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के यूज़रनेम या हैंडल भरने होंगे। जानकारी गलत या अधूरी देने पर वीज़ा से इनकार और भविष्य में आवेदन की पात्रता पर असर पड़ सकता है।”
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम वीज़ा प्रक्रिया की सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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