मैनचेस्टर टेस्ट में भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे शुभमन गिल की रणनीतियों पर क्रिकेट एक्सपर्ट्स और फैन्स दोनों ने सवाल उठाए हैं। खासतौर पर वॉशिंगटन सुंदर को बहुत देर से गेंदबाजी में लाने के फैसले को लेकर काफी आलोचना हो रही है।
इस मैच में भारतीय गेंदबाज इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर ज्यादा दबाव नहीं बना पाए। खासतौर पर तीसरे दिन के खेल में इंग्लिश बल्लेबाजों ने भारतीय अटैक को संभलकर खेलते हुए बड़े रन बनाए। हालांकि, टीम के पास वॉशिंगटन सुंदर जैसे ऑफ स्पिनर मौजूद थे, जिन्हें शुभमन गिल ने काफी देर से यानी 68वें ओवर में गेंद थमाई।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुंदर को पहले ही गेंदबाजी में लाना चाहिए था, क्योंकि पिच स्पिनर्स के लिए मददगार दिख रही थी और उस समय तेज गेंदबाज थक चुके थे।
पूर्व कोच रवि शास्त्री ने कमेंट्री के दौरान कहा, “जब पिच सूखी हो और बल्लेबाज जम चुके हों, तब स्पिनर्स को जल्दी आजमाना चाहिए। सुंदर के पास अनुभव है और उन्हें इतनी देर से गेंद देना समझ से परे है।” उन्होंने साथ ही बुमराह और जडेजा की गेंदबाजी के समय प्रेशर बनाने में नाकामी पर भी चिंता जताई।
इंग्लैंड की टीम ने पहली पारी में मजबूत स्कोर खड़ा किया है, जिससे भारत पर दबाव बना है। शुभमन गिल के कप्तान के तौर पर फैसले अब टीम की स्थिति को और मुश्किल बना रहे हैं। सुंदर जब आए तब तक इंग्लैंड का स्कोर काफी आगे निकल चुका था और गेंदबाज थक चुके थे।
शुभमन गिल का यह टेस्ट कप्तानी के तौर पर एक अहम इम्तिहान है। हालांकि वह युवा हैं और उनके पास सीखने का समय है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर फैसला मैच की दिशा तय कर सकता है। सुंदर को देर से गेंदबाजी देना शायद एक बड़ी रणनीतिक चूक साबित हो सकता है, जिसका असर भारत की हार-जीत पर पड़ेगा।
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