तेहरान / उर्मिया, 25 जून 2025
ईरान ने बुधवार सुबह तीन पुरुषों को फांसी पर लटकाने की पुष्टि की, जिन्हें इजरायल के लिए जासूसी और देश में आतंकी साजिशों में शामिल होने का दोषी ठहराया गया था। यह फांसी ऐसे वक्त में दी गई है जब ईरान और इजरायल के बीच युद्धविराम को महज एक दिन हुआ है।
🔍 कौन थे ये तीन आरोपी?
ईरान की न्यायपालिका द्वारा जारी बयान में जिन तीन लोगों को फांसी दी गई, उनके नाम हैं:
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इदरीस अली
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आज़ाद शोजाई
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रसूल अहमद रसूल
बयान में कहा गया कि ये तीनों तुर्की सीमा के पास स्थित उर्मिया शहर में पकड़े गए थे और उन पर “इस्राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम करने” का आरोप था।
⚖️ आरोप और सज़ा
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ईरानी अधिकारियों के मुताबिक,
“तीनों ने देश में हत्या की साजिश के लिए खतरनाक उपकरण लाने की कोशिश की थी।”
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उन्हें “इस्लामी गणराज्य के खिलाफ ज़ायोनिस्ट शासन के पक्ष में सहयोग” करने का दोषी पाया गया।
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फांसी की सजा बुधवार सुबह उर्मिया में अंजाम दी गई।
📸 सार्वजनिक किया गया फोटो
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ईरानी मीडिया ने तीनों आरोपियों की नीली जेल यूनिफॉर्म में तस्वीरें साझा कीं।
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फांसी से पहले उन्हें “त्वरित न्याय प्रक्रिया” के तहत दोषी ठहराया गया था।
🌍 अंतरराष्ट्रीय चिंता और रिकॉर्ड
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मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ईरान दुनिया का दूसरा सबसे अधिक फांसी देने वाला देश है, पहले स्थान पर चीन है।
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एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य मानवाधिकार संस्थाएं ईरान की “त्वरित और पारदर्शिता रहित फांसी प्रक्रिया” पर लगातार सवाल उठाती रही हैं।
⚔️ युद्ध के बाद की कार्रवाई
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यह फांसी उस युद्ध के तुरंत बाद दी गई है जो 13 जून को ईरान और इजरायल के बीच भड़का था।
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तेहरान ने उस समय कहा था कि “जो भी दुश्मन के लिए जासूसी करते पकड़े जाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।”
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बीते रविवार और सोमवार को भी ईरान ने मोसाद से जुड़े दो अन्य संदिग्धों को फांसी दी थी।
📌 निष्कर्ष
ईरान का यह कदम यह दर्शाता है कि तेहरान और तेल अवीव के बीच तनाव कम नहीं हुआ, बल्कि “सीज़फायर” के बावजूद जमीनी स्तर पर जवाबी कार्रवाई तेज़ हुई है।
जहां एक तरफ ईरान इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला मानता है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे मानवाधिकार उल्लंघन के तौर पर देख रहा है।
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