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ईरान ने दिखाई संतुलित कूटनीति, पाकिस्तान की भारत को घेरने की कोशिश बेअसर

तेहरान/इस्लामाबाद/नई दिल्ली — पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की भूराजनीतिक हलचल के बीच ईरान और पाकिस्तान के संबंधों में गर्माहट लौटती दिख रही है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने तेहरान का दौरा किया। इस दौरान ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से महत्वपूर्ण मुलाकातें हुईं। हालांकि पाकिस्तान ने भारत और कश्मीर से जुड़ा मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन ईरान ने उस पर संयमित और संतुलित प्रतिक्रिया दी।


गाजा संघर्ष बना सामंजस्य की कुंजी, पर भारत पर हमले में नहीं खेला साथ

ईरान और पाकिस्तान को एक मंच पर लाने वाला अहम कारण गाजा में चल रहा संघर्ष है। अक्टूबर 2023 में शुरू हुए इज़राइल-हमास युद्ध ने मुस्लिम जगत को झकझोर दिया है। पाकिस्तान ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद तेज़ किया। अयातुल्ला खामेनेई ने इस्लामी देशों को इज़राइल के खिलाफ एकजुट रहने का आह्वान किया, लेकिन भारत-पाक संघर्ष के संदर्भ में उनकी टिप्पणी बहुत नपी-तुली रही।

उनका स्पष्ट संदेश था: “हमें खुशी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम हुआ है, और हमें उम्मीद है कि सभी विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझेंगे।”


पाकिस्तान की कोशिश: भारत को घेरना, ईरान की प्रतिक्रिया: तटस्थता और शांति की अपील

प्रधानमंत्री शरीफ ने कश्मीर, पानी के बंटवारे और व्यापार जैसे विषयों पर भारत से संवाद की इच्छा जताई और ईरान की “सकारात्मक भूमिका” की प्रशंसा की। लेकिन ईरान ने कोई पक्ष नहीं लिया। राष्ट्रपति पेजेशकियान ने सिर्फ भारत-पाकिस्तान के बीच स्थायी युद्धविराम और मुलाकात से विवाद सुलझाने की बात कही।


पृष्ठभूमि: एक साल पहले हुई थी दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव

जनवरी 2024 में ईरान और पाकिस्तान एक-दूसरे की सीमा में हवाई हमले कर चुके हैं। ईरान ने जैश अल-अदल आतंकी संगठन को निशाना बनाया था, वहीं पाकिस्तान ने बलूच लिबरेशन फ्रंट पर कार्यवाही की थी। लेकिन इसके बाद दोनों देशों ने तनाव कम करने के लिए उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला शुरू किया। ईरान के सर्वोच्च नेता ने अपने बयान में इस ऐतिहासिक भाईचारे को दोहराया और पाकिस्तान की इराक-ईरान युद्ध के दौरान भूमिका को भी याद किया।


भारत-ईरान संबंध: स्थिर और संतुलित

जब पाकिस्तान तेहरान में कूटनीतिक समीकरण बना रहा था, भारत ने 9 मई को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की मेज़बानी की। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक में आतंकवाद की निंदा, क्षेत्रीय सहयोग और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा हुई। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से उसका विवाद द्विपक्षीय मामला है, और बातचीत केवल एक विषय पर संभव है — पाक अधिकृत कश्मीर की वापसी और आतंकियों पर कार्यवाही


गाजा पर भारत का रुख: संतुलित और मानवीय

भारत ने गाजा संघर्ष पर संतुलन बनाए रखा है। उसने अक्टूबर 2023 में हमास के आतंकी हमले की निंदा की, लेकिन साथ ही गाजा में नागरिकों की पीड़ा पर चिंता जताई और मानवीय सहायता का समर्थन किया। भारत ने पारंपरिक रूप से दो-राज्य समाधान के पक्ष में रहा है।


भूराजनीतिक निष्कर्ष: नई दिल्ली की रणनीति में स्पष्टता

ईरान और पाकिस्तान की नज़दीकी भारत को लेकर आशंकाएं जरूर पैदा कर सकती हैं, लेकिन तेहरान की ओर से आई प्रतिक्रियाएं दिखाती हैं कि वह संतुलन साध रहा है। अमेरिका के साथ उसकी बढ़ती टकराव की स्थिति, परमाणु कार्यक्रम को लेकर वैश्विक दबाव और भारत के साथ उसके ऊर्जा, चाबहार पोर्ट और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स जैसे साझा हित, ईरान को भारत से दूरी बनाने से रोकते हैं।


निष्कर्ष: पाकिस्तान की ‘भारत फोकस्ड डिप्लोमेसी’ को नहीं मिला अंतरराष्ट्रीय साथ

पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की, लेकिन ईरान जैसे प्रभावशाली देश ने संयमित और संतुलित रुख अपनाया। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत के खिलाफ कूटनीतिक लामबंदी अब काम नहीं आ रही, खासकर तब जब भारत आर्थिक, सैन्य और राजनयिक रूप से पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है।


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