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ईरान पर हमला: इजराइल को किसने दिया रास्ता? दोस्त की आड़ में दुश्मन निकला कौन?

तेहरान पर हुए इजरायली हमले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इराक या सीरिया से सीधी सीमा न होने के बावजूद इजराइल ने ईरान के अंदर गहरे तक जाकर करीब 100 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें परमाणु संयंत्र भी शामिल थे। यह सवाल अब ज़ोर पकड़ रहा है कि आख़िर इजराइल ने यह हमला किसके सहयोग से अंजाम दिया? और कहीं कोई ऐसा देश तो नहीं जिसने पर्दे के पीछे से इजराइल को रास्ता दिया?


खुला समर्थन और छिपी मिलीभगत

इजराइल का हमला केवल उसकी सैन्य ताकत का नतीजा नहीं था, बल्कि इसमें कम से कम दो देशों के सहयोग की बात सामने आ रही है।

  • जॉर्डन ने पहले ही इजराइल के समर्थन में बयान देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।

  • लेकिन दूसरा देश कौन था? यही सबसे बड़ा रहस्य है।

संभावनाओं की बात करें तो ये देश हो सकते हैं:

  • सऊदी अरब

  • इराक

  • सीरिया

इनमें से किसी एक ने गुप्त रूप से इजराइल को एयर कॉरिडोर मुहैया कराया हो सकता है, जिससे उसके फाइटर जेट्स तेहरान तक पहुंच सके।


हमले के 5 संभावित हवाई रास्ते:

इजराइल के पास ईरान तक पहुंचने के लिए कई रास्ते हो सकते हैं, लेकिन इनमें से हर एक में भू-राजनीतिक समीकरण और गुप्त साझेदारियों की भूमिका रही होगी। संभावित रास्ते:

  1. इजराइल → जॉर्डन → इराक → ईरान
    जॉर्डन की खुली मदद और इराक की चुप्पी इस रास्ते को मजबूत बनाती है।

  2. इजराइल → सऊदी अरब → खाड़ी क्षेत्र → ईरान
    सऊदी-ईरान संबंधों में हाल ही में थोड़ी नरमी जरूर आई है, लेकिन पर्दे के पीछे कुछ और कहानी हो सकती है।

  3. इजराइल → सीरिया की सीमा से होते हुए → इराक → ईरान
    सीरिया, जहां ईरानी प्रभाव पहले से मौजूद है, वहां से इजराइल को रास्ता मिलना थोड़ा मुश्किल, पर असंभव नहीं।

  4. अज़रबैजान या काकेशस से होकर खुफिया कॉरिडोर
    यह दूरस्थ और रणनीतिक ऑप्शन हो सकता है, लेकिन लंबा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है।

  5. यूएई या बहरीन जैसे खाड़ी सहयोगी देशों की लॉजिस्टिक मदद
    सीधा रास्ता न सही, पर किसी एयरबेस या ईंधन सपोर्ट के रूप में मदद की संभावना।


सऊदी, सीरिया या इराक – किसने निभाई दोहरी भूमिका?

  • सऊदी अरब: हाल ही में चीन की मध्यस्थता से ईरान के साथ रिश्ते सुधरे हैं, लेकिन इस्लामी प्रतिस्पर्धा, CPEC, और यमन युद्ध जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच अब भी गहरी दरार है।

  • इराक: अमेरिकी प्रभाव वाला यह देश अक्सर खुद दोहरी स्थिति में होता है। इजराइल के लिए रास्ता देने की संभावना कम लगती है, लेकिन ईरानी मिलिशियाओं पर लगे आरोपों को देखते हुए, चुपचाप कॉरिडोर मिल गया हो, यह नकारा नहीं जा सकता।

  • सीरिया: यहां ईरान का असर गहरा है, लेकिन रूस और इजराइल के बीच बैकडोर बातचीत के चलते अस्थायी उड़ान सहमति की संभावना भी देखी जा सकती है।


निष्कर्ष: पर्दे के पीछे की गद्दारी?

इजराइल की इस अभूतपूर्व कार्रवाई के बाद, ईरान की खुफिया एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है – हमलावर आया कैसे?
जब जमीनी सीमा नहीं, तो आकाशीय राह किसने खोली?

हो सकता है आने वाले दिनों में इस ‘साज़िश’ की परतें खुलें, लेकिन फिलहाल इतना तो तय है – ईरान के दुश्मनों की फेहरिस्त में कोई नया नाम जुड़ चुका है, जो अब भी दोस्त होने का मुखौटा लगाए हुए है।

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