तेहरान/दुबई, 14 जून 2025 — ईरान के खिलाफ इजरायल द्वारा किए गए हालिया सैन्य हमलों के पीछे सिर्फ फाइटर जेट और मिसाइलें नहीं थीं, बल्कि एक गुप्त रणनीतिक ऑपरेशन भी था — जिसमें इजरायल की खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ की बड़ी भूमिका सामने आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, मोसाद ने हमले से पहले ईरान के भीतर ड्रोन और हथियारों की तस्करी की और उन्हें बेहद सटीक तरीकों से तैनात किया गया।
ईरान के भीतर से हुआ हमला, बना खास बेस
इजरायली सुरक्षा सूत्रों ने खुलासा किया है कि हमले के लिए ईरान के अंदर ही एक गुप्त ऑपरेटिंग बेस बनाया गया था। इस बेस से विस्फोटक ड्रोन छोड़े गए, जिन्होंने ईरानी मिसाइल लांचर्स और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
सूत्रों के अनुसार:
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मध्य ईरान में सतह से हवा में मार करने वाली प्रणालियों के पास सटीक हथियार पहुंचाए गए।
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कुछ हथियार ईरान में तस्करी के जरिए भेजे गए और स्ट्राइक सिस्टम्स को वाहनों पर छुपा कर तैनात किया गया।
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ऑपरेशन शुरू होते ही इन्हें रिमोट से एक्टिवेट किया गया।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू का बयान
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ये हमले ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर केंद्रित थे और देश की सुरक्षा के लिए “जरूरी” थे। उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो इजरायल पूरी तरह तैयार है।
ईरान का जवाब: 100+ ड्रोन इजरायल की ओर दागे
इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने भी जवाबी हमला करते हुए 100 से अधिक ड्रोन इजरायल की ओर दागे हैं। इसके बाद जॉर्डन और इराक में हवाई सायरन बजने लगे और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
📌 क्या कहता है यह घटनाक्रम?
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मोसाद का कथित इन्वॉल्वमेंट यह दिखाता है कि इजरायल ने सिर्फ बाहरी हमलों पर नहीं, बल्कि ईरान के भीतर भी रणनीतिक घुसपैठ की योजना बनाई थी।
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यह नया आयाम दोनों देशों के बीच छद्म युद्ध (proxy war) को एक प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष में बदलने का संकेत देता है।
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