तेहरान – ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष के कारण वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार निगरानी बनाए हुए हैं और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा वापस भारत लाने के प्रयास जारी हैं।
ईरान में कितने भारतीय मूल के लोग रहते हैं?
ईरान में वर्तमान समय में लगभग 10,000 भारतीय मूल के नागरिक मौजूद हैं। इनकी बड़ी आबादी मुख्य रूप से तेहरान, मशहद और बंदर अब्बास जैसे प्रमुख शहरों में रहती है। हालात बिगड़ने के बाद कुछ भारतीयों को ईरान की राजधानी से हटाकर कोम (Qom) जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित इलाकों में शिफ्ट किया गया है।
भारतीय छात्रों की स्थिति कैसी है?
ईरान में पढ़ाई करने वाले 1,000 से 1,500 भारतीय छात्र मौजूद हैं, जिनमें बड़ी संख्या जम्मू-कश्मीर से संबंध रखने वाले युवाओं की है।
हाल की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 110 छात्रों को सुरक्षित निकालकर अर्मेनिया पहुंचाया गया है, जहां से उन्हें फ्लाइट द्वारा भारत भेजे जाने की तैयारी है। अर्मेनिया पहुंचे छात्रों में से करीब 90 छात्र जम्मू-कश्मीर के हैं।
बंदर अब्बास और चाबहार का भारत से संबंध
बंदर अब्बास, जो ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्र में स्थित है, भारतीय मूल के लोगों की एक अहम बस्ती है। इसका कारण इसका निकटता से चाबहार बंदरगाह से जुड़ा होना है – एक ऐसा बंदरगाह जिसमें भारत की रणनीतिक और आर्थिक भागीदारी है। चाबहार के शाहिद बेहिश्ती पोर्ट टर्मिनल के प्रबंधन की जिम्मेदारी भारत के पास है, जिससे इस क्षेत्र में भारतीय गतिविधि अपेक्षाकृत अधिक है।
भारत सरकार की कोशिशें
भारत सरकार और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। न केवल लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है, बल्कि निकासी (evacuation) की प्रक्रिया को लेकर भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
जरूरत पड़ने पर वायु मार्ग के ज़रिए छात्रों और नागरिकों को भारत वापस लाने की व्यवस्था की जाएगी।
निष्कर्ष
ईरान में रहने वाले भारतीय नागरिकों और छात्रों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। बदलते हालात में भारत ने त्वरित कदम उठाकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि हर नागरिक को समय रहते सहायता और सुरक्षा मिले।
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