20 जून 2025
ईरान और इसराइल के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच वहां फंसे भारतीय छात्र अब सुरक्षित अपने वतन लौटने लगे हैं। भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंधु’ के पहले चरण में 110 छात्रों को ईरान से निकालकर नई दिल्ली लाया गया। इनमें से कई छात्रों ने युद्ध जैसे हालात में बिताए अपने भयावह अनुभव साझा किए हैं।
“घर लौटकर सुकून मिला”
उत्तर भारत के रहने वाले यासिर गफ़्फार उन छात्रों में शामिल हैं, जो हालात बिगड़ने पर भारत वापस लाए गए। उन्होंने कहा, “रात में धमाके सुनते थे, मिसाइलें आसमान में दिखती थीं। भारत पहुंचकर राहत मिली है। जब सब शांत हो जाएगा, तो वापस पढ़ाई पूरी करने का इरादा है।”
दिल्ली की छात्रा मरियम रोज़ की यादें अब भी ताज़ा हैं। उन्होंने बताया, “एक रात डॉरमेट्री के ऊपर से मिसाइल गुज़री, इतनी तेज़ आवाज़ आई कि मेरी खिड़की तक हिल गई थी। उस पल दिल दहल गया था।”
छात्रों की वतन वापसी की राह
इन छात्रों को पहले ईरान के उर्मिया शहर से सड़क के रास्ते आर्मीनिया ले जाया गया। फिर वहां से हवाई मार्ग से सभी को दिल्ली लाया गया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह रेस्क्यू मिशन काफी संवेदनशील था और इसे सावधानीपूर्वक अंजाम दिया गया।
अमान नज़र, जो कई सालों से ईरान में पढ़ाई कर रहे थे, कहते हैं, “ऐसा कभी नहीं सोचा था कि इस तरह घर लौटना पड़ेगा। परिवार को देखकर खुशी का ठिकाना नहीं है, लेकिन दिल में डर अब भी है।”
अधूरी पढ़ाई, अधूरी उम्मीदें
हुमैरा सादिक़ के लिए ये वापसी दोहरी भावना लेकर आई। उन्होंने कहा, “मां-बाप से मिलकर दिल खुश है, लेकिन कोर्स का आख़िरी साल अधूरा रह गया। लगा नहीं था कि पढ़ाई छोड़कर अचानक लौटना पड़ेगा। जो कुछ वहां देखा, वो कभी भूल नहीं पाऊंगी।”
परिवारों की बेचैनी और राहत
21 वर्षीय माज़ हैदर के माता-पिता, हैदर अली और अर्शी हैदर, कई घंटे एयरपोर्ट पर बेटे के इंतज़ार में बैठे रहे। उन्होंने बताया, “माज़ बार-बार कह रहा था कि वहां का माहौल ठीक नहीं है। शुक्र है सरकार ने समय रहते उन्हें सुरक्षित निकाल लिया।”
बुलंदशहर निवासी डॉ. परवेज़ आलम भी अपने बेटे समीर के लौटने की प्रतीक्षा में थे। उन्होंने कहा, “हम बहुत चिंतित थे। सरकार की त्वरित कार्रवाई के लिए आभारी हैं।”
‘ऑपरेशन सिंधु’: भारत सरकार की त्वरित पहल
ईरान-इसराइल युद्ध के हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंधु की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लौटाना है।
17 जून को पहले चरण में उर्मिया क्षेत्र से छात्रों को आर्मीनिया ले जाया गया और वहां से 18 जून को फ्लाइट के जरिए दिल्ली पहुंचाया गया। इस अभियान की निगरानी भारत के विदेश मंत्रालय और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने मिलकर की।
फिलहाल, ईरान के अन्य शहरों — खासकर तेहरान और इस्फहान — में अब भी कई भारतीय छात्र मौजूद हैं। वहां के हालात गंभीर हैं और भारत सरकार आने वाले दिनों में उन्हें भी सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया तेज़ करेगी।
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