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उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोटों को साधने की तैयारी जोर पकड़ रही है। BJP, सपा, BSP और कांग्रेस सभी राजनीतिक दल इस वोट बैंक को रिझाने में लगे हैं।
BJP की रणनीति
- अंबेडकर जयंती से पहले कदम: संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने कई जिलों में जाकर दलितों के बीच योजनाओं की जानकारी दी और संगोष्ठियों का आयोजन किया।
- अंबेडकर मूर्ति विकास योजना: बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर, संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसी मूर्तियों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
- BJP का दावा: प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी के अनुसार, BJP सरकार का फोकस हमेशा दलित उत्थान और महापुरुषों को सम्मान देने पर रहा है।
सपा की रणनीति
- दलित पर फोकस: लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद सपा ने दलित वोट बैंक पर खास ध्यान देना शुरू किया है।
- समारोह और जयंती: सपा ने कांशीराम और अंबेडकर जयंती मनाकर दलितों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश तेज कर दी है।
- सपा का दावा: प्रदेश प्रवक्ता अशोक यादव का कहना है कि BJP का दलित प्रेम सिर्फ चुनावी है, जबकि सपा दलितों के अधिकार दिलाने के लिए काम करती है।
कांग्रेस की रणनीति
- पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को बुलाकर दलित वोटों को आकर्षित करने की कोशिश।
- पार्टी ने कई कार्यक्रम आयोजित किए और अपना एजेंडा जनता तक पहुंचाया।
- कांग्रेस का कहना है कि BJP की चुनावी योजनाओं से दलितों का असली उत्थान नहीं होता।
BSP की रणनीति
- जाटव वोट बैंक पर जोर: BSP अपनी पारंपरिक ताकत को बचाने और सपा को आगाह करने में लगी है।
- मायावती का रोल: दलित राजनीति में BSP का नेतृत्व अभी भी मजबूत है, लेकिन बदलते राजनीतिक समीकरण चुनौती दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक की राय
विशेषज्ञ वीरेंद्र सिंह रावत के अनुसार, विधानसभा चुनाव में दलित वोट बैंक कई सीटों पर जीत-हार तय करेगा। इसी कारण सभी दल इस वर्ग पर विशेष फोकस कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव दलित वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है।
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