Breaking News
china

क्या चीन थामेगा ईरान-इजराइल की जंग? बीजिंग ने जताई चिंता, दी मध्यस्थता की पेशकश

बीजिंग/तेहरान/यरुशलम – पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर अब चीन की निगाहें भी टिकी हुई हैं।
बीजिंग ने सार्वजनिक रूप से दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है और संकेत दिए हैं कि वह इस टकराव में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।


“इस जंग में किसी की जीत नहीं”: चीन की चेतावनी

चीन के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि मौजूदा संघर्ष न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक है, बल्कि इससे किसी भी पक्ष को कोई लाभ नहीं होगा।
बयान में कहा गया:

“हम संबंधित सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे अधिकतम संयम बरतें, और विवादों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाएं।”

बीजिंग ने इस दौरान अपने नागरिकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है, जो ईरान और इजराइल में निवास कर रहे हैं।


अलजज़ीरा रिपोर्ट: इजराइल पर चीन की अप्रत्यक्ष आलोचना

अलजज़ीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को सीधे तो नहीं, लेकिन स्पष्ट रूप से नकारात्मक संकेत दिए हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन का विरोध करता है।
यह इशारा इजराइल की सैन्य कार्रवाई की वैधता पर बीजिंग के संदेह को दर्शाता है।


क्या चीन बन सकता है शांति का सेतु?

चीन ने संकेत दिया है कि यदि दोनों पक्ष तैयार हों, तो वह एक “निष्पक्ष मध्यस्थ” के रूप में बातचीत को संभव बना सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह पेशकश 2023 में ईरान और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते की सफलता से प्रेरित है, जिसमें बीजिंग ने सक्रिय भूमिका निभाई थी।


बीजिंग की रणनीति: तेहरान के साथ मजबूती, यरुशलम से दूरी

  • ईरान और चीन के बीच 2016 में एक व्यापक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।

  • चीन, ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार और व्यापारिक साझेदार है।

  • वहीं दूसरी ओर, गाजा संघर्ष और फिलिस्तीन मुद्दे पर चीन की इजराइल से दूरी बढ़ी है। बीजिंग लगातार दो-राज्य समाधान की मांग करता रहा है।

इस पृष्ठभूमि में यह स्पष्ट है कि चीन तेहरान के करीब है, जबकि यरुशलम से राजनयिक दूरी बनाए हुए है।


निष्कर्ष: क्या चीन बनेगा नया शांतिदूत?

जब पूरी दुनिया युद्ध की आहट से डरी हुई है, तब चीन एक शांतिप्रिय ताकत के रूप में खुद को प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है।
ईरान और इजराइल के बीच तनाव को शांत करना न केवल चीन के राजनयिक कद को बढ़ाएगा, बल्कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों की भी रक्षा करेगा।

अब देखना यह है कि क्या ईरान और इजराइल चीन के प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हैं, या यह प्रयास भी सिर्फ एक बयान बनकर रह जाएगा।

About Chandni Khan

Check Also

homuz

ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी की: अमेरिकी सूत्र

वॉशिंगटन:ईरान ने जून महीने में फारस की खाड़ी में अपने जहाजों पर समुद्री बारूदी सुरंगें …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Channel 009
help Chat?