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american attack in iran

क्या ट्रंप ने एक और ‘अनंत युद्ध’ की शुरुआत कर दी है?

लेखकीय विश्लेषण:
एक ऐसे राष्ट्रपति के लिए जो दुनिया भर में अमेरिकी दखल को खत्म करने और युद्धों को समाप्त करने के वादे के साथ सत्ता में आए थे, ईरान पर हमला करना एक बड़ा मोड़ है — और संभवतः इतिहास का एक निर्णायक क्षण।

रविवार को अमेरिका ने जब ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान जैसे प्रमुख परमाणु स्थलों पर हमला किया, तो वह स्वयं उसी क्षेत्रीय संघर्ष में उतर गया जिसे ट्रंप ने कभी खत्म करने की बात की थी। उन्होंने ईरान को वार्ता के लिए दो सप्ताह का समय देने की बात कही थी, लेकिन दो दिन में ही उन्होंने निर्णायक सैन्य कार्रवाई का आदेश दे दिया।

व्हाइट हाउस से दिए गए अपने संबोधन में, ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की संवर्धन क्षमता “पूरी तरह तबाह” कर दी गई है और चेताया कि यदि ईरान शांति की राह नहीं अपनाता तो अगले हमले और भी व्यापक हो सकते हैं।


💣 ‘बंकर बस्टर’ हमले: शक्ति का प्रदर्शन

अमेरिका ने पहली बार अपने 30,000-पाउंड वजनी GBU-57A/B Massive Ordnance Penetrator (MOP) बमों का प्रयोग किया — जिन्हें ‘बंकर बस्टर’ कहा जाता है — ताकि गहरे ज़मीन के नीचे छिपे ईरानी परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया जा सके।

हालांकि इसकी सफलता पर संदेह बरकरार है, क्योंकि ईरानी अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने संवर्धित यूरेनियम पहले ही अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया था।

यदि वास्तव में ईरान की परमाणु क्षमताएं निष्क्रिय हो चुकी हैं, तो इज़राइल इसे अपनी ‘रणनीतिक सफलता’ बताकर संघर्ष को विराम देने का प्रयास कर सकता है। अमेरिका की ओर से भी संकेत मिले हैं कि यह हमला किसी ‘रेजीम चेंज’ का प्रयास नहीं था। लेकिन ट्रंप ने इसके विपरीत अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखा,

“अगर मौजूदा ईरानी शासन ‘Make Iran Great Again’ नहीं कर सकता, तो शासन परिवर्तन क्यों न हो? MIGA!!!”


🇮🇷 क्या ईरान चुप बैठेगा?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका ने “लाल रेखा पार” की है और अब ईरान के पास “संप्रभुता की रक्षा का अधिकार” है। उन्होंने यह भी कहा कि अब कूटनीति के लिए कितना स्थान बचा है, यह कहना मुश्किल है।

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका हस्तक्षेप करता है, तो “अपूरणीय क्षति” झेलनी होगी। यमन में ईरान समर्थक हूती पहले ही रेड सी में अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दे चुके हैं। इसके अलावा, ईरानी संसद ने होरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की योजना को स्वीकृति दे दी है — हालांकि अंतिम निर्णय ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद पर निर्भर करेगा।

खामेनेई के लिए यह अस्तित्व का संकट है। ‘महाशैतान’ अमेरिका को जवाब न देना उनके वैचारिक और राजनीतिक नेतृत्व की साख को नुकसान पहुंचा सकता है।


🇺🇸 ट्रंप का दांव: क्या ये उल्टा पड़ सकता है?

ट्रंप शायद इस उम्मीद में हैं कि अमेरिका और इज़राइल के दबाव से ईरान वार्ता की मेज़ पर कमजोर स्थिति में लौटेगा। लेकिन इतिहास गवाह है कि ईरान दबाव में झुकने के बजाय और अधिक आक्रामक हो जाता है।

यदि ईरान ने बदला लिया — खासकर अमेरिकी अड्डों या सैनिकों को लक्ष्य बनाकर — तो ट्रंप को फिर से हमला करने का दबाव बढ़ सकता है। और तब अमेरिका एक बड़े युद्ध में फंस सकता है — ठीक वैसे ही जैसे अफगानिस्तान या इराक में हुआ था।

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे “ऐतिहासिक परिवर्तन” बताया है। लेकिन क्या यह बदलाव पश्चिम के पक्ष में होगा या अमेरिका की रणनीतिक विफलताओं की एक और कड़ी बनेगा, यह समय ही बताएगा।


⚖️ निष्कर्ष: इतिहास की स्याही अभी सूखी नहीं है

यदि ईरान की परमाणु क्षमता को स्थायी रूप से निष्क्रिय किया गया, और क्षेत्र में एक नया शक्ति संतुलन स्थापित हुआ, तो यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक निर्णायक जीत मानी जा सकती है।

लेकिन यदि यह हमला केवल एक अति-आक्रामक अमेरिकी रवैये का प्रतीक बन कर रह गया — और ईरान ने जोरदार जवाब दिया — तो ट्रंप का यह दांव एक नई “फॉरएवर वॉर” की शुरुआत बन सकता है, जिसमें अमेरिका फिर से गहराई तक उलझ जाए।


लेखकीय टिप्पणी:
इतिहास की अंतिम पंक्तियां अभी लिखी जानी बाकी हैं। प्रश्न यह है कि क्या यह अध्याय युद्ध की आग में झुलसेगा या कूटनीति की स्याही में निखरेगा?


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