मेलबर्न:
पृथ्वी की सतह का लगभग दो-तिहाई हिस्सा हर समय बादलों से ढका रहता है। ये बादल आमतौर पर सूरज की रोशनी को वापस अंतरिक्ष में परावर्तित कर पृथ्वी को ठंडा रखने में मदद करते हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे धरती गर्म हो रही है, वैसे-वैसे बादलों की प्रकृति भी बदल रही है — और ये परिवर्तन पृथ्वी के और अधिक गर्म होने में योगदान दे रहे हैं।
नवीनतम अध्ययन, जो NASA के गोडार्ड इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज के नेतृत्व में हुआ है, यह दर्शाता है कि बादलों में हो रहे बदलावों ने हाल के वर्षों में वैश्विक तापमान को अपेक्षा से कहीं अधिक बढ़ा दिया है।
☁️ कैसे काम करते हैं बादल
बादल सूर्य की रोशनी को अंतरिक्ष में वापस भेजते हैं और इस तरह धरती को ठंडा बनाए रखते हैं।
हालांकि, हर प्रकार का बादल यह काम समान रूप से नहीं करता:
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चमकीले, सफेद बादल, खासकर जो भूमध्यरेखा के पास होते हैं, अधिक रोशनी को परावर्तित करते हैं।
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वहीं धुंधले, टूटे-फूटे बादल या ध्रुवों के पास बने बादल कम रोशनी को परावर्तित करते हैं।
🔍 अध्ययन में क्या सामने आया?
शोधकर्ताओं ने पाया है कि:
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बहुत अधिक रोशनी परावर्तित करने वाले बादलों का क्षेत्रफल घट रहा है।
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जबकि कम परावर्तक, टूटे बादलों का विस्तार हो रहा है।
इसका परिणाम यह है कि ज़्यादा सूर्य ऊर्जा पृथ्वी की सतह तक पहुंच रही है और वहां अवशोषित होकर तापमान बढ़ा रही है।
🌍 वैश्विक स्तर पर क्या हो रहा है
पृथ्वी की हवा की बड़ी प्रणालियाँ (wind systems) गर्म क्षेत्रों से उठती गर्म हवा और पृथ्वी की गति से बनती हैं। यही प्रणालियाँ यह तय करती हैं कि बादल कहाँ और कैसे बनेंगे।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण ये वायुमंडलीय सर्कुलेशन सिस्टम भी बदल रहे हैं, जिससे इक्वेटर के पास “इंटरट्रॉपिकल कन्वर्जेंस ज़ोन” और 30-40 डिग्री अक्षांश पर स्थित “स्टॉर्म ट्रैक्स” जैसे क्षेत्रों में चमकीले बादल घट रहे हैं।
वहीं “ट्रेड विंड” क्षेत्र, जहां हल्के व बिखरे बादल होते हैं, फैल रहा है।
🔁 ग्लोबल वार्मिंग का फीडबैक चक्र
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जैसे-जैसे धरती गर्म हो रही है, हवा की प्रमुख धाराएं बदल रही हैं।
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इससे चमकीले बादलों की संख्या घट रही है, जिससे अधिक गर्मी पृथ्वी पर आ रही है।
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यह एक “पॉज़िटिव फीडबैक लूप” है: गर्मी → हवा बदलती है → बादल बदलते हैं → और अधिक गर्मी।
🔬 अभी और रिसर्च बाकी है
वैज्ञानिक इस फीडबैक चक्र के सूक्ष्म पहलुओं को समझने के लिए सैटेलाइट से जुड़े डेटा का उपयोग कर रहे हैं — जिसमें यह देखा जा रहा है कि धरती को कितनी ऊर्जा मिल रही है और वह कितनी ऊर्जा वापस अंतरिक्ष में भेज रही है।
📝 लेखक: क्रिश्चियन जैकब, निदेशक, ARC सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर द वेदर ऑफ द 21st सेंचुरी, मोनाश यूनिवर्सिटी
📌 यह लेख Creative Commons लाइसेंस के तहत The Conversation से अनुवादित और रूपांतरित किया गया है।
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