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क्यों भड़का इजरायल-ईरान युद्ध? बच्चों के सेंटर पर मिसाइल हमले के दावे से मचा हड़कंप

ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव अब पूर्ण युद्ध का रूप ले चुका है। शुक्रवार, 20 जून 2025 को इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि ईरानी मिसाइल हमले में दक्षिणी इजरायल के एक बच्चों के सेंटर को निशाना बनाया गया है। यह वीडियो सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हड़कंप मच गया।


वीडियो में क्या है?

24 सेकंड की इस क्लिप में एक क्रेच जैसा कमरा दिखता है, जहां खिलौने बिखरे पड़े हैं। लगभग 3 सेकंड के दृश्य में धूल और मलबा उड़ता नजर आता है, जिससे स्पष्ट होता है कि किसी विस्फोट की वजह से यह तबाही हुई।

हालांकि, इस वीडियो में कोई बच्चा नजर नहीं आता और इस बात की भी पुष्टि नहीं हुई है कि यह स्थान बीर्शेबा स्थित सोरोका मेडिकल सेंटर के पास है या नहीं – जिस पर एक दिन पहले ईरान द्वारा हमला किया गया था।


सोरोका अस्पताल को भी पहुंचा नुकसान

गुरुवार को हुए मिसाइल हमले में इजरायल के प्रमुख अस्पतालों में से एक, सोरोका मेडिकल सेंटर को गंभीर नुकसान पहुंचा।

  • अस्पताल के कई हिस्सों की खिड़कियां और छतें ढह गईं

  • नेत्र रोग विभाग, जो तीसरी मंजिल पर था, वह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया।

  • हालांकि सौभाग्य से, जिस हिस्से को नुकसान हुआ, वह कुछ दिन पहले ही खाली किया गया था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।
    फिर भी दर्जनों लोग घायल हुए हैं और कई चिकित्सीय उपकरण नष्ट हो गए।


नेतन्याहू का सख्त संदेश: “तेहरान को चुकानी होगी कीमत”

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घटनास्थल का दौरा कर ईरान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:

“हम तेहरान के तानाशाहों को इसकी भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करेंगे।”

यह बयान युद्ध को और अधिक तीव्र बना सकता है क्योंकि इजरायल अब सीधी कार्रवाई के मूड में दिखाई दे रहा है।


ईरान की सफाई: “अस्पताल नहीं, सैन्य ठिकाना था लक्ष्य”

ईरानी सेना की ओर से बयान में कहा गया है कि

“हमारा लक्ष्य अस्पताल नहीं था, बल्कि उसके पास स्थित इजरायली कमांड और इंटेलिजेंस सेंटर था।”

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उन्होंने सटीक गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल किया और आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया गया


निष्कर्ष: क्या इस युद्ध का इंसानी चेहरा बचा है?

बच्चों के केंद्र और अस्पताल जैसे मानवीय ठिकानों को लेकर हो रहे दावे और पलटवार दर्शाते हैं कि यह संघर्ष अब सैन्य से ज्यादा मनोवैज्ञानिक और प्रतीकात्मक युद्ध में बदलता जा रहा है। दोनों देशों के नेता अपने-अपने देशवासियों को यह दिखाने में लगे हैं कि वे कमजोरी नहीं दिखा रहे — चाहे कीमत आम नागरिकों की सुरक्षा क्यों न हो।

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