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खुले में कचरा जलाना: पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा

छतरपुर। शहर के आउटर हाइवे पर नगरपालिका द्वारा कचरा डंप किया जा रहा है। इसके साथ ही लोग प्लास्टिक जैसे खतरनाक कचरे को खुले में जलाने की लापरवाही भी कर रहे हैं। जबकि खुले में कचरा जलाने से पर्यावरण को भारी नुकसान होता है, और इसे रोकने के लिए एनजीटी ने देशभर में प्रतिबंध लगाया हुआ है।

हर दिन जल रहा कचरा

प्रतिबंध के बावजूद, खुले में कचरा जलाना आम हो गया है। जहां कचरे के ढेर होते हैं, वहां लोग या नगर परिषद के सफाई कर्मचारी अक्सर आग लगा देते हैं। छोटे कूड़ेदानों से लेकर बड़े डंपरों तक, कचरे को जलाकर खत्म किया जा रहा है।

कचरा जलाने से होने वाले नुकसान

खुले में जलाए जाने वाले कचरे में प्लास्टिक और पॉलीथिन जैसी हानिकारक चीजें होती हैं। इनके जलने से निकलने वाला विषैला धुआं पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरनाक होता है। इसमें कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, और नाइट्रोजन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें होती हैं, जो:

  • पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं।
  • फेफड़ों और मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं।
  • दमा और सांस संबंधी रोगों को बढ़ावा देती हैं।

सड़ते कचरे से भी खतरा

खुले में डंप किए गए कचरे से गंदगी फैलती है और वायु प्रदूषण होता है। प्लास्टिक, कांच, कागज, भोजन के अवशेष, जानवरों की हड्डियां, और सब्जियों के छिलके जैसे कचरे से न केवल गंध फैलती है, बल्कि यह प्रशासनिक समस्याएं भी पैदा करता है।
ऐसे क्षेत्रों में अक्सर आग लगने की घटनाएं होती हैं, जिससे वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है।

एनजीटी का आदेश

दिसंबर 2016 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने खुले में कचरा जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अनुसार:

  • साधारण मामलों में 5,000 रुपये का जुर्माना।
  • बड़ी मात्रा में कचरा जलाने पर 25,000 रुपये का जुर्माना।

जुर्माना और स्वच्छता अभियान

नगरपालिका के सीएमओ दिनेश तिवारी का कहना है कि लोग सड़क पर कचरा फेंकते हैं, खुले में जलाते हैं और गंदगी फैलाते हैं। ऐसे लोगों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
“स्वच्छता के लिए नागरिकों और कर्मचारियों का समन्वय जरूरी है। तभी शहर स्वच्छ और सुंदर बन सकेगा।”

निष्कर्ष

खुले में कचरा जलाना न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि यह स्वास्थ्य को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। समय पर सख्त कदम उठाने और जागरूकता फैलाने की जरूरत है ताकि इस समस्या को रोका जा सके।

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