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बुंदेलखंड में नेशनल हाईवे-44 पर बांदरी कस्बे के पास स्थित खेजरा धाम में महाकाल मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई है। यहां 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस आयोजन को “नव शिवरात्रि” नाम दिया गया है।
महाशिवरात्रि के दिन मंदिर सुबह 4 बजे से रात 12 बजे तक भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहेगा। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के सभी संस्कार वैदिक रीति-रिवाज से कराए जाएंगे।
पहली बार होगा महाशिवरात्रि का आयोजन
खेजरा धाम में इस साल पहली बार महाशिवरात्रि का भव्य आयोजन किया जा रहा है। मंदिर का निर्माण विशेष तरीके से किया गया है। निर्माण कार्य केवल पुष्य नक्षत्र में ही किया जाता है। अब तक 108 पुष्य नक्षत्र में मंदिर का निर्माण हो चुका है।
इस मंदिर की स्थापना का संकल्प पंडित महेश तिवारी ने लिया। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने और सरकारी नौकरी करने के बाद सब कुछ छोड़कर गांव लौटकर महाकाल की सेवा में खुद को समर्पित कर दिया। साल 2015 में मंदिर निर्माण का काम शुरू किया गया।
उज्जैन महाकाल मंदिर की तर्ज पर बना धाम
खेजरा धाम का निर्माण उज्जैन के महाकाल मंदिर की शैली पर किया गया है।
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मंदिर का प्रवेश द्वार और गर्भगृह उसी तरह बनाया गया है।
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गुफानुमा रास्ते और दक्षिण दिशा से प्रवेश की व्यवस्था भी वैसी ही है।
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परिसर में रुद्र सागर तालाब का निर्माण भी किया जा रहा है।
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मंदिर की ऊंचाई अभी 52 फीट तक बन चुकी है।
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उज्जैन की तरह यहां भी नागचंद्रेश्वर मंदिर बनाया जाएगा, जिसके दर्शन साल में एक बार नाग पंचमी पर होंगे।
गर्भगृह में भगवान महाकाल के साथ माता गौरी, गणेश जी और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा स्थापित की गई है।
रामराजा सरकार और राधा-कृष्ण दरबार भी
महाकाल धाम परिसर में केवल शिव मंदिर ही नहीं, बल्कि श्री राधा-कृष्ण दरबार और रामराजा सरकार का मंदिर भी बनाया गया है।
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बाईं ओर राधा-कृष्ण दरबार
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दाईं ओर रामराजा सरकार की स्थापना
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परिसर में यज्ञशाला और महाकाल उपवन भी तैयार किया गया है।
महाशिवरात्रि के इस विशेष आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है। खेजरा धाम अब बुंदेलखंड क्षेत्र में एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में उभर रहा है।
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