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जिले में जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन अनूपपुर जिले का ऐतिहासिक सामतपुर तालाब अभी भी गंदगी और उपेक्षा का शिकार है।
तालाब के चारों ओर गाजर घास और कचरा फैला हुआ है। घाटों की हालत भी बेहद खराब है। नगर पालिका और प्रशासन ने इसकी सफाई और देखरेख की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
भूमि विवाद बना सौंदर्यीकरण में रोड़ा
तालाब के एक हिस्से में बाउंड्री वॉल बनाने का काम भूमि विवाद की वजह से कई महीनों से रुका हुआ है।
नगर पालिका के एक पार्षद और उनके परिवार का कहना है कि तालाब की एक ज़मीन उनके निजी स्वामित्व की है। जबकि तालाब की कुल जमीन 17 एकड़ है, जिसमें से 13 एकड़ तालाब में और बाकी कुछ हिस्से पर सड़क बनी हुई है।
पुराने समय में यहां पथ वे, बिजली और बच्चों के झूले लगाए गए थे, तब कोई आपत्ति नहीं थी। लेकिन अब जब बाउंड्री बनाने का काम शुरू हुआ तो इसे निजी ज़मीन बताकर काम रुकवा दिया गया। इसके बाद ना तो नगर पालिका ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी और ना ही काम दोबारा शुरू करवाया गया।
देखरेख के लिए कोई कर्मचारी नहीं
सेवानिवृत्त शिक्षक नरेंद्र सिंह ने बताया कि पहले तालाब की देखरेख के लिए तीन कर्मचारी तैनात थे, लेकिन अब कोई नहीं है। इसी वजह से तालाब उपेक्षा का शिकार हो गया है।
ढाई करोड़ की योजना भी अधूरी
नगरवासी अशोक यादव ने बताया कि पिछले कार्यकाल में तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए ढाई करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। यह पैसा खनिज प्रतिष्ठान मद से मिला था। शुरुआत में यह कार्य लोक निर्माण विभाग (PWD) को दिया गया, लेकिन काम से असंतोष के बाद इसे नगर पालिका को सौंप दिया गया। इसमें पेवर ब्लॉक, बाउंड्री, बिजली, शौचालय निर्माण शामिल थे, लेकिन सभी काम अधूरे हैं।
प्रशासन का आश्वासन
अपर कलेक्टर दिलीप पांडेय ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान अभी जारी है। जल्दी ही तालाब पर काम शुरू किया जाएगा। साथ ही भूमि विवाद की जांच कर अधूरे कार्य पूरे करवाने के निर्देश दिए जाएंगे।
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