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मजदूरों को गांव में ही रोजगार देने की योजना
टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों में मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति दर्ज हो रही है, जबकि मौके पर कोई मजदूर नजर नहीं आता। इस समस्या को देखते हुए सरकार ने 30 अप्रैल तक ग्राम पंचायत स्तर पर मजदूरों का सर्वे कराने का आदेश दिया है।
जिले में मजदूरों की स्थिति
टीकमगढ़ जिले की 324 ग्राम पंचायतों में 1,27,142 मजदूरों के जॉब कार्ड एक्टिव हैं, लेकिन सभी को रोजगार नहीं मिल पाया। गांव में काम न मिलने की वजह से कई मजदूर परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए शहरों की ओर चले गए। हालांकि, उनकी उपस्थिति मनरेगा के तहत दर्ज हो रही थी, लेकिन मौके पर कोई मजदूर नहीं था। यह मामला विधानसभा में भी उठाया गया, जिसके बाद सरकार ने ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वे करने का आदेश दिया।
कोविड के समय लौटे मजदूर फिर से पलायन कर गए
कोविड के दौरान गांव लौटे मजदूरों को काम देने की कोशिश की गई थी, लेकिन अब वे फिर से शहरों की ओर पलायन कर गए हैं। ऐसे मजदूरों की जानकारी इकट्ठा करने के लिए जिला स्तर पर सर्वे कराने के आदेश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायतों में सर्वे के लिए टीम बनी
गांव के मजदूरों को वहीं रोजगार देने के लिए पंचायत विभाग सक्रिय हो गया है।
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ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सहायकों को मजदूरों की पूरी जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।
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जनपद पंचायत के सीईओ ने 30 अप्रैल तक मजदूरों की पूरी रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है।
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सरकार की योजना है कि गांव में ही रोजगार देकर मजदूरों का पलायन रोका जाए।
सरकार का सख्त कदम
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए कड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायत सीईओ और अधिकारियों की बैठक लेकर इस योजना को लागू करने के निर्देश दिए हैं।
फैक्ट फाइल
✅ 4 जनपद पंचायत
✅ 324 ग्राम पंचायतें
✅ 1,27,142 एक्टिव जॉब कार्ड
अधिकारियों का कहना है
“गांव के मजदूरों को गांव में ही रोजगार देने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए पंचायत सचिव और रोजगार सहायक मजदूरों का सर्वे कर रहे हैं।”
– सिद्ध गोपाल वर्मा, सीईओ, जनपद पंचायत जतारा/पलेरा
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