रफह/गाजा –
गाजा पट्टी एक बार फिर खून से लाल हो गई है। रविवार को मानवीय सहायता केंद्र के पास भोजन की प्रतीक्षा कर रही भीड़ पर हुई गोलीबारी में कम से कम 31 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई, जबकि 170 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल पास के नासिर अस्पताल, खान यूनिस में भर्ती कराया गया है।
फायरिंग से मचा कोहराम, इजरायली सेना ने पल्ला झाड़ा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सहायता वितरण स्थल से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर हजारों लोग भोजन के लिए इकट्ठा हुए थे। तभी अचानक चारों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई। लोगों का आरोप है कि यह फायरिंग इजरायली सेना और उनकी ओर से तैनात टैंकों, ड्रोन और नौसेना के जहाजों से की गई।
हालांकि, इजरायली सेना ने एक संक्षिप्त बयान जारी करते हुए कहा कि उसे “सहायता वितरण स्थल के भीतर गोलीबारी से हुई क्षति” की कोई जानकारी नहीं है।
मानवीय संस्था और स्थानीय प्रशासन की राय में टकराव
गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन, जो इन सहायता केंद्रों का संचालन कर रहा है, ने कहा कि उनके निजी सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह की फायरिंग नहीं की। हालांकि, इजरायली सेना ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने “भीड़ को चेतावनी देने के लिए” गोलियां चलाई थीं।
फाउंडेशन के मुताबिक, रविवार सुबह 16 ट्रकों से खाद्य सामग्री वितरित की गई थी और उस समय किसी हिंसा की घटना की पुष्टि नहीं हुई थी।
रेडक्रॉस और स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट में अंतर
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की कि रविवार को गोलीबारी में 31 लोग मारे गए और 170 से अधिक लोग घायल हुए। वहीं, रेडक्रॉस द्वारा संचालित अस्पताल के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मरने वालों की संख्या 21 और घायलों की संख्या 175 हो सकती है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई दिल दहला देने वाली घटनाएं
घटनास्थल पर मौजूद अम्र अबू तेइबा ने बताया,
“हम सुबह से ही कतार में खड़े थे। जैसे ही हम सहायता केंद्र की तरफ बढ़े, चारों तरफ से अचानक गोलियां चलने लगीं — टैंकों, जहाजों और ड्रोन से। हर कोई इधर-उधर भागने लगा।”
इब्राहिम अबू सऊद, उम्र 40 वर्ष, ने कहा कि उसने सेना की सीधी गोलीबारी होते देखी और एक युवक को मौके पर ही मरते देखा, जिसकी कोई मदद नहीं कर पाया।
33 वर्षीय मोहम्मद अबू तेइमा ने भी बताया कि गोलीबारी में उसका रिश्तेदार और एक महिला की जान चली गई।
स्थिति चिंताजनक, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा
इस घटना ने गाजा में पहले से ही गंभीर मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। जहां एक ओर लोग भोजन और दवाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सहायता केंद्र भी रक्तरंजित संघर्ष का केंद्र बनते जा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र, रेडक्रॉस, और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की निगाह अब इस पर है कि इजरायल इस स्थिति पर क्या रुख अपनाता है और क्या मानवीय गलियारे को सुरक्षित बनाया जा सकता है।
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