गाज़ा पट्टी में इज़राइल और हमास के बीच जारी संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय हालात को गहराते हुए संकट में डाल दिया है। हर दिन करीब 200 लोगों की जान जा रही है और इज़राइल ने अब गाज़ा पर पूर्ण नियंत्रण का ऐलान कर दिया है। वहीं, हमास स्थानीय नागरिकों को सुरक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। इस बीच यूरोपीय देशों में राय बंटी हुई है, और डोनाल्ड ट्रंप की दोहरी रणनीति ने विवाद को और भी उलझा दिया है।
राफा – आख़िरी दरवाज़ा, अब तबाही के कगार पर
गाज़ा का दक्षिणी सिरा, राफा, अब भी हजारों फिलिस्तीनियों की आख़िरी उम्मीद बना हुआ है — लेकिन इज़राइली हमलों ने इसे लगभग मिट्टी में मिला दिया है। यह सब कुछ “ऑपरेशन गिडियंस चैरियट” के तहत हो रहा है। इस अभियान को लेकर यह भी अनुमान लगाए जा रहे हैं कि इसकी योजना वाशिंगटन के पेंटागन में बनी थी, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
नेतन्याहू की सख्ती, ट्रंप की चुप्पी
इस अभियान पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोई सीधा बयान नहीं दिया है, जिससे यह धारणा बन रही है कि वह परोक्ष रूप से इस सैन्य कार्रवाई को समर्थन दे रहे हैं। वहीं, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद गाज़ा पर नियंत्रण बरकरार रहेगा।
इज़राइल ने खाद्य सहायता की आपूर्ति बहाल करने का संकेत दिया है, लेकिन साथ ही हमलों की तीव्रता में भी कोई कमी नहीं आई है। यह विरोधाभास एक बार फिर वैश्विक समुदाय को असमंजस में डाल रहा है।
हमास की रणनीति और पलायन पर रोक
इज़राइल ने फिलिस्तीनियों के सीमित पलायन को मंज़ूरी दी है, लेकिन कड़ी निगरानी के साथ ताकि हमास के लड़ाके गाज़ा से बाहर न जा सकें। इस नीति ने यूरोपीय देशों में गहरी असहमति पैदा कर दी है।
ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने एक संयुक्त बयान जारी कर इज़राइल से हमले रोकने और मानवीय सहायता बहाल करने की मांग की है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्होंने कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है।
हर दिन बढ़ रही तबाही, भूख और भय
गाज़ा में हर दिन का हमला पहले से भीषण और विनाशकारी होता जा रहा है। औसतन 200 से अधिक मौतें रोज़ दर्ज की जा रही हैं। इस भयावहता के बीच, ट्रंप प्रशासन ने अब तक केवल एक कार्रवाई की है — इज़राइल दौरा स्थगित कर दिया गया है।
हूती और ईरान की प्रतिक्रिया
युद्ध की इस स्थिति से यमन के हूती विद्रोहियों ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने इज़राइल के खिलाफ हाइफा बंदरगाह पर नौसैनिक घेराबंदी की चेतावनी दी है, जिससे शिपिंग कंपनियों में खलबली मच गई है।
वहीं ईरान ने अज़रबैजान के पास सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जिसे कई विश्लेषक संभावित अमेरिकी हस्तक्षेप के खिलाफ तैयारी मान रहे हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि गाज़ा संघर्ष अब सिर्फ इज़राइल और हमास तक सीमित नहीं रहा।
निष्कर्ष:
गाज़ा अब वैश्विक संघर्ष की प्रतीक भूमि बन चुकी है। एक तरफ हर दिन का बढ़ता नरसंहार, दूसरी ओर भूख और पलायन की त्रासदी, और तीसरी ओर कूटनीतिक असहमति की दरारें — यह सब मिलकर मध्य-पूर्व को फिर से विस्फोटक मोड़ पर ले आए हैं।
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