Related Articles
सागर जिले में प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जहां 23 बाघ और 180 से ज्यादा तेंदुए हैं। इसके अलावा, यहां दो बड़े वन मंडल उत्तर और दक्षिण भी हैं। हालांकि, वन्यजीवों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए वन विभाग के पास कोई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। पिछले 6 सालों से यहां बाघों की बसाहट होने के बावजूद अब तक इनकी देखभाल के लिए कोई एक्सपर्ट नियुक्त नहीं किया गया है। जब कोई बाघ या अन्य वन्यजीव घायल या बीमार होता है, तो गाय-भैंस के इलाज करने वाले डॉक्टर्स को बुलाया जाता है। यहां तक कि मृत वन्यजीवों का पोस्टमार्टम भी स्थानीय पशु चिकित्सक ही करते हैं।
टाइगर रिजर्व में डॉक्टर की कमी
यहां टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही गिद्धों का संरक्षण भी हो रहा है और अन्य वन्यजीव भी यहां रहते हैं। इन जानवरों में आपसी संघर्ष या अन्य हादसों के चलते इलाज की जरूरत होती है। ऐसे में टाइगर रिजर्व में एक एक्सपर्ट डॉक्टर की नियुक्ति बेहद जरूरी है, लेकिन अब तक कोई स्थाई डॉक्टर नहीं है।
अन्य टाइगर रिजर्व पर निर्भरता
यहां कई बार ऐसी स्थिति आई है कि बाघों को ट्रेंक्युलाइज करना पड़ा, जैसे कॉलर आईडी पहनाने के लिए या उनके मूवमेंट की वजह से। चूंकि यहां कोई विशेषज्ञ नहीं है, इसलिए पन्ना, कान्हा, बांधवगढ़ या भोपाल से एक्सपर्ट को बुलाना पड़ता है, जिसमें एक से दो दिन का समय लग जाता है।
वन क्षेत्र का दायरा
- टाइगर रिजर्व: वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जो सागर, नरसिंहपुर और दमोह तक फैला है, जिसका क्षेत्रफल 2300 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा है।
- दक्षिण वन मंडल: यह सागर शहर से शुरू होकर भोपाल मार्ग, राहतगढ़, विदिशा और रायसेन तक फैला है।
- उत्तर वन मंडल: यह बहेरिया थाना क्षेत्र से शुरू होकर उत्तरप्रदेश की सीमा और शाहगढ़ तक फैला है।
मुख्य जानकारी
- 03 वन मंडल: सागर जिले में
- 23 बाघ: टाइगर रिजर्व में
- 180+ तेंदुए: जिले में
- 80-80 किमी: तक फैली वन मंडल की सीमाएं
वन विभाग का कहना: टाइगर रिजर्व में स्थाई डॉक्टर की आवश्यकता है, जिसके लिए मुख्यालय में डिमांड भेजी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही डॉक्टर की नियुक्ति हो जाएगी।
— डॉ. एए अंसारी, उप संचालक, टाइगर रिजर्व
CHANNEL009 Connects India
