कोपेनहेगन:
डेनमार्क के आर्कटिक कमांड के प्रमुख सॉरेन एंडरसन ने कहा है कि अमेरिका की ग्रीनलैंड पर संभावित दावे की खबरों से उन्हें कोई चिंता नहीं है। यह बयान उन्होंने उस बैठक के बाद दिया जिसमें उन्होंने अमेरिकी उत्तरी कमान के एक वरिष्ठ जनरल से पहली बार मुलाकात की थी। साथ ही, उन्होंने रूस से संभावित हमले की आशंका को लेकर सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता भी जताई।
ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नजर क्यों?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बात कह चुके हैं। ग्रीनलैंड डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, जो उत्तर अमेरिका और यूरोप के बीच रणनीतिक रूप से अहम स्थिति में स्थित है और अमेरिकी मिसाइल चेतावनी प्रणाली के लिए भी जरूरी है।
हाल ही में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कांग्रेस सुनवाई में यह नकारा नहीं कि ग्रीनलैंड को बलपूर्वक लेने की योजना मौजूद नहीं है।
एंडरसन की प्रतिक्रिया:
“ऐसे किसी भी परिदृश्य की मुझे कोई चिंता नहीं है। मैं पूरी तरह से सुकून से सोता हूं,” एंडरसन ने रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा।
“सैन्य स्तर पर हमारा सहयोग अमेरिका के साथ हमेशा की तरह मज़बूत है।”
महत्वपूर्ण दौरे और सैन्य अभ्यास:
19–20 जून को अमेरिकी जनरल ग्रेगरी गिलॉट ने ग्रीनलैंड स्थित पिटुफिक स्पेस बेस का दौरा किया, जो अमेरिकी उत्तरी कमान के अधीन आ गया है। यह दौरा डेनमार्क द्वारा आयोजित शीतयुद्ध के बाद सबसे बड़े सैन्य अभ्यासों के दौरान हुआ, जिसमें ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर फोकस किया गया।
रूस और चीन की संभावनाएं:
हालांकि पहले रूसी और चीनी जहाज़ ग्रीनलैंड के आसपास देखे गए हैं, एंडरसन ने कहा कि इस वर्ष कोई खतरे की स्थिति नहीं बनी है।
“हम इस साल किसी रूसी या चीनी जहाज़ की उपस्थिति नहीं देख रहे हैं।”
कुत्तों की स्लेज गश्त और सीमित संसाधन:
ग्रीनलैंड की निगरानी मुख्य रूप से चार पुरानी नौकाओं, एक निगरानी विमान और कुत्तों की स्लेज से होने वाली गश्तों से की जाती है। अब यह बल केवल मछली पकड़ने जैसे नागरिक कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय रक्षा पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
“वास्तव में ग्रीनलैंड की रक्षा करना मुश्किल नहीं है,” एंडरसन ने कहा। “कुछ ही स्थान हैं जिनकी रणनीतिक रूप से सुरक्षा करनी है — और हमारे पास उसके लिए योजनाएं हैं। NATO के पास भी योजनाएं हैं।”
अभ्यास और भविष्य की रणनीति:
डेनमार्क ने इस महीने के सैन्य अभ्यासों में F-16 फाइटर जेट्स, विशेष बलों और नौसेना के जहाज़ों को तैनात किया है। अभ्यास खत्म होने पर ये बल वापस लौटेंगे, लेकिन एंडरसन चाहते हैं कि इस तरह के अभ्यास बार-बार हों।
“अगर हम इस क्षेत्र को संघर्ष-मुक्त रखना चाहते हैं, तो हमें अपनी सैन्य उपस्थिति मज़बूत करनी होगी। अगर रूस अपने व्यवहार में बदलाव लाता है, तो हमें तत्काल प्रतिक्रिया देने में सक्षम होना चाहिए।”
डेनमार्क का बजट और यूरोपीय समर्थन:
जनवरी में डेनमार्क ने आर्कटिक सुरक्षा के लिए $2 बिलियन से अधिक के बजट की घोषणा की थी, जिसमें नई नौसेनाएं, ड्रोन और सैटेलाइट निगरानी शामिल हैं। फ्रांस ने ग्रीनलैंड में सैनिक भेजने की पेशकश की है, और EU के सैन्य प्रमुखों ने भी इसका समर्थन किया है।
भौगोलिक सुरक्षा:
ग्रीनलैंड की राजधानी नूउक में करीब 20,000 लोग रहते हैं, जबकि शेष 57,000 लोग देश के पश्चिमी तट पर फैले 71 छोटे-छोटे शहरों में रहते हैं। पूर्वी तट की कठिन भौगोलिक स्थिति खुद ही एक प्रभावी रक्षा के रूप में काम करती है।
“अगर कोई रूसी सैन्य जहाज पूर्वी तट पर उतर भी जाए, तो कुछ ही समय में वह अभियान एक रेस्क्यू मिशन में बदल जाएगा,” एंडरसन ने मुस्कराते हुए कहा।
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