ग्लोबल हुआ ‘सनातन गौरव’: इंडोनेशिया से कंबोडिया और बहरीन तक धरोहरों को नई पहचान
channel_009 | Cultural News
भारत की सांस्कृतिक विरासत अब सिर्फ देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रही। इंडोनेशिया, कंबोडिया, बहरीन और कई दूसरे देशों में फैली भारतीय सभ्यता से जुड़ी धरोहरों को दोबारा पहचान दिलाने की कोशिशें तेज हुई हैं। इसी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सांस्कृतिक कूटनीति चर्चा में है।
विदेशों में मंदिर, पुरातात्विक स्थल, प्राचीन मूर्तियां, रामायण-महाभारत से जुड़े सांस्कृतिक प्रतीक और भारतीय परंपराओं की झलक आज भी मौजूद है। सरकार इन्हें भारत की सॉफ्ट पावर और सभ्यतागत जुड़ाव के रूप में दुनिया के सामने रख रही है।
इंडोनेशिया में रामायण और गणेश से जुड़ी परंपराएं, कंबोडिया में अंकोरवाट जैसे ऐतिहासिक स्थल और बहरीन सहित खाड़ी देशों में भारतीय समुदाय की सांस्कृतिक गतिविधियां इस बात का उदाहरण हैं कि भारतीय संस्कृति का प्रभाव वैश्विक स्तर पर फैला हुआ है।
पीएम मोदी कई विदेशी दौरों में भारतीय विरासत, योग, मंदिरों और सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते रहे हैं। इससे विदेशों में बसे भारतीयों के बीच भी सांस्कृतिक गर्व की भावना मजबूत हुई है।
channel_009 निष्कर्ष:
विदेशों में फैली भारतीय धरोहरों को नई पहचान देना सिर्फ संस्कृति का विषय नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक पहचान और कूटनीति का भी हिस्सा है। यह संदेश देता है कि सनातन और भारतीय सभ्यता की जड़ें दुनिया के कई हिस्सों तक फैली हुई हैं।
आपकी राय क्या है—क्या भारत को विदेशों में अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को और मजबूती से प्रमोट करना चाहिए? कमेंट में बताइए।
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