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चीन की मांग से पाकिस्तान में गधे हुए ‘कीमती’, कीमतें लाखों में, आम आदमी बेहाल

कराची: पाकिस्तान में गधे अब सिर्फ मेहनत के जानवर नहीं रहे, बल्कि ‘मंहगे संसाधन’ बन गए हैं। वजह है चीन की पारंपरिक औषधियों में इस्तेमाल होने वाला एक खास उत्पाद — ईजियाओ (Ejiao), जिसे गधे की खाल से तैयार किया जाता है। इस बढ़ती मांग ने पाकिस्तान के गरीब मजदूरों की मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी हैं। जहां कुछ साल पहले एक गधा 30,000 रुपये में मिल जाता था, वहीं अब उसकी कीमत 2 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।

गधे की मौत के बाद टूटे रशीद के सपने

कराची के मजदूर अब्दुल रशीद का दर्द इन हालात की सटीक तस्वीर पेश करता है। हाल ही में उसके पास का एकमात्र गधा ‘टाइगर’ एक दुर्घटना में मारा गया। यही गधा उसका रोज़गार और ज़िंदगी का सहारा था। अब नया गधा खरीदना उसके लिए नामुमकिन हो गया है। “जो गधा मैंने 8 साल पहले 30 हज़ार में लिया था, उसकी आज की कीमत 2 लाख से ज़्यादा है,” रशीद दुखी मन से बताता है।

चीन में बढ़ती ‘ईजियाओ’ की डिमांड

ईजियाओ एक पारंपरिक चीनी टॉनिक है जिसे गधे की खाल को उबालकर तैयार किया जाता है। इसका उपयोग थकान मिटाने, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, एनीमिया से राहत और यहां तक कि ट्यूमर को कम करने में भी किया जाता है। चीन में इस औषधि की मांग इतनी तेज़ी से बढ़ी है कि स्थानीय गधों की आपूर्ति से काम नहीं चल पा रहा, जिसके चलते चीन अब पाकिस्तान जैसे देशों की ओर रुख कर रहा है।

गधे बना रहे व्यापार का केंद्र

कराची के एक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. गुओ जिंग फेंग का कहना है, “गधे की खाल अब वैश्विक व्यापार का हिस्सा बन गई है। चीन में इसकी मांग इतनी अधिक है कि यह आपूर्ति की क्षमता से कहीं आगे निकल चुकी है।” अप्रैल 2025 में, एक चीनी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान में गधा फार्म स्थापित करने में रुचि भी जताई थी।

60 लाख गधों का देश, फिर भी किल्लत

पाकिस्तान में अनुमानित 59 लाख कामकाजी गधे हैं, जो इसे इथियोपिया और सूडान के बाद दुनिया में तीसरे नंबर पर रखता है। लेकिन स्थानीय उपयोग और चीन में खाल की निर्यात मांग के कारण कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि गरीब मजदूर अब इन्हें खरीदने की स्थिति में नहीं हैं।

मेहनतकशों की कमर टूटी

ईंट-भट्टों, वेस्ट कलेक्शन, खेती और ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में गधा एक अहम कड़ी है। कराची के ल्यारी में सबसे बड़ा गधों का बाजार है, लेकिन वहां भी अब डेढ़ लाख रुपये से कम में गधा नहीं मिलता। मजदूर समद बताते हैं, “मेरी रोजाना की कमाई 1500 से 2000 रुपये है, जिसमें आधा पैसा गधे की देखरेख में ही चला जाता है।”

क्या आगे और बढ़ेगी मुश्किलें?

ईजियाओ उद्योग में पिछले पांच वर्षों में 160% की वृद्धि हुई है, और इस रफ्तार से यह मांग लगातार बनी रहेगी। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो इन जानवरों के सहारे अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो पाकिस्तान में गधा खरीदना गरीबों के लिए सपना ही रह जाएगा।

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