नई दिल्ली/नाय पि तॉ: म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र में चल रहे सशस्त्र संघर्ष में चीन को बड़ा धक्का लगा है। स्थानीय विद्रोही गुटों ने चीन निर्मित एक फाइटर जेट को मार गिराया है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 72 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस हमले में अत्याधुनिक हथियारों का नहीं, बल्कि 0.50 कैलिबर एम2 ब्राउनिंग मशीन गन का इस्तेमाल किया गया।
🔥 हमले की पृष्ठभूमि: विद्रोही मोर्चे पर हमला, लेकिन पलटा पासा
4 जून को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के लड़ाकों ने सगाइंग के कान दौक पुलिस स्टेशन पर कब्जे के लिए अभियान छेड़ा था। जवाबी कार्रवाई में म्यांमार सेना ने चीनी फाइटर जेट और Y-12 विमान से बमबारी शुरू कर दी। लेकिन जब फाइटर जेट नीचे आया, तभी विद्रोहियों ने मशीन गन से सटीक निशाना साधते हुए उसे गिरा दिया।
📉 चीन के लिए क्यों शर्मिंदगी भरा है यह मामला?
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सस्ते हथियार बनाम महंगे जेट:
PLA जैसे विद्रोही समूह के पास केवल गुरिल्ला रणनीति और सीमित संसाधन हैं। उन्होंने बिना किसी एंटी-एयर मिसाइल के केवल मशीन गन से करोड़ों का जेट गिरा दिया। -
हथियारों की साख पर सवाल:
चीन म्यांमार और पाकिस्तान जैसे देशों को अरबों डॉलर के हथियार बेचता है। 2023 में ही चीन ने म्यांमार को करीब 1 बिलियन डॉलर का सैन्य सामान दिया था। अब एक मामूली मशीन गन से जेट गिरने से चीन के हथियारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। -
राजनीतिक नियंत्रण पर भी असर:
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के इशारे पर विद्रोहियों ने कुछ समय पहले म्यांमार सेना से जीती हुई ज़मीन वापस छोड़ दी थी। अब इसी विद्रोही समूह द्वारा चीनी तकनीक से बने विमान को गिराने की खबर ने संकेत दिया है कि म्यांमार में चीन का प्रभाव अब उतना प्रभावी नहीं रहा।
👀 चश्मदीदों का दावा – मशीन गन से गिरा विमान
स्थानीय मीडिया इरावड्डी और प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया है कि हमले के दौरान जमीन से 0.50 कैलिबर की एम2 ब्राउनिंग मशीन गन चलाई गई थी, जिससे यह विमान नीचे आ गिरा। हालांकि, न म्यांमार सेना और न ही PLA ने इस दावे की पुष्टि की है। लेकिन अगर यह सच है तो यह आधुनिक वायु शक्ति के खिलाफ पारंपरिक हथियारों की अभूतपूर्व जीत मानी जाएगी।
✍️ निष्कर्ष
म्यांमार में जारी संघर्ष अब सिर्फ आंतरिक सत्ता संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह चीन की सैन्य प्रतिष्ठा के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। PLA जैसे विद्रोही गुटों के पास आधुनिक हथियार नहीं हैं, फिर भी वे सटीक और रणनीतिक हमलों से म्यांमार सेना को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने चीन की हथियार निर्यात नीति और प्रभाव क्षेत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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